US-Iran War Ceasefire: ‘पाकिस्तान दलाल और भारत को मिला तेल…’ ईरान-US सीजफायर पर प्रियंका चतुर्वेदी का बड़ा वार

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच 40 दिनों के भीषण संघर्ष के बाद आखिरकार युद्धविराम का ऐलान हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा करते हुए ईरान की 10 प्रमुख शर्तों को स्वीकार कर लिया है। इस बीच, शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने पाकिस्तान की भूमिका और भारत के तेल हितों पर बड़ा बयान दिया है।

US-Iran War Ceasefire

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 8, 2026

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US-Iran War Ceasefire: ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच पिछले 40 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बाद आखिरकार युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो सप्ताह के लिए संघर्ष विराम का ऐलान किया है। इस कूटनीतिक जीत के पीछे ईरान द्वारा रखे गए 10 सूत्रीय प्रस्ताव की अहम भूमिका रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की इन शर्तों को स्वीकार कर लिया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव में फिलहाल कमी आने की उम्मीद है।

तेहरान की कड़ी शर्तें और वाशिंगटन का समझौतावादी रुख

ईरान ने अमेरिका के साथ युद्धविराम के लिए जो 10 शर्तें रखी हैं, उनमें भविष्य में ईरान पर हमला न करने और लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने की प्रतिबद्धता शामिल है। इसके अलावा, ईरान ने अब तक हुए आर्थिक और बुनियादी ढांचे के नुकसान की भरपाई की मांग भी की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सेना अब ईरान के पावर प्लांट, पुलों और अन्य नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना नहीं बनाएगी। इस ऐतिहासिक समझौते को औपचारिक रूप देने के लिए 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक प्रस्तावित है।

प्रियंका चतुर्वेदी की तीखी प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी राय साझा की है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस सीजफायर से ईरान को अपनी बात रखने का मंच मिल गया और अमेरिका ने अपनी साख बचा ली। प्रियंका के अनुसार, इजरायल को अब कड़वी हकीकत का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस संकट के टलने से भारत को कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो गई है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत है।

शांति बहाली में पाकिस्तान की विवादास्पद भूमिका

प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने पोस्ट में पाकिस्तान की भूमिका पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने पाकिस्तान को मिलने वाले ‘थैंक्यू नोट’ पर कटाक्ष करते हुए उसे उस ‘दलाल’ की तरह बताया जो संकट के समय पैसे लेकर समाधान का झांसा देता है। उन्होंने इस संदर्भ में भारत के विदेश मंत्री द्वारा सर्वदलीय बैठक में कही गई बातों का समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान केवल आर्थिक लाभ के लिए इस शांति प्रक्रिया में बिचौलिए की भूमिका निभा रहा है।

भारत की कूटनीतिक तटस्थता और राष्ट्रीय हित

भारत की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रियंका ने दो टूक कहा कि अमेरिका-ईरान वार्ता में भारत के सीधे हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने तर्क दिया कि यह युद्ध भारत का नहीं था, इसलिए इसमें अनावश्यक रूप से शामिल होने की आलोचना बेमानी है। भारत का प्राथमिक उद्देश्य अपनी ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शांति है, जो इस अस्थायी युद्धविराम से फिलहाल सुरक्षित नजर आ रही है। दुनिया को अस्थायी रूप से मिली इस शांति का स्वागत करते हुए उन्होंने इस घटनाक्रम पर नजर रखने के लिए आभार व्यक्त किया।

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