Iran US Ceasefire Controversy: मध्य पूर्व की राजनीति में एक बार फिर अस्थिरता का दौर शुरू हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जिस सीजफायर समझौते की चर्चा जोरों पर थी, वह अब विवादों के घेरे में है। इस पूरे मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि एक व्यापक युद्धविराम पर सहमति बन गई है, लेकिन अब अमेरिका, ईरान और इजरायल तीनों ने अलग-अलग रुख अपनाकर इस राजनयिक समझौते (Diplomatic Agreement) की धज्जियां उड़ा दी हैं।
शहबाज शरीफ का सोशल मीडिया पोस्ट
बताते चले कि, विवाद की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बाद ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के लिए हमले रोकने पर सहमति बनी है। शहबाज शरीफ ने विशेष रूप से लेबनान में युद्धविराम (Ceasefire in Lebanon) का उल्लेख किया था। हालांकि, अमेरिकी व्हाइट हाउस ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए शरीफ के दावे को सिरे से खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि लेबनान कभी भी इस 14 दिवसीय समझौते का हिस्सा नहीं था।
युद्धविराम समझौते के बाद भी लेबनान पर इजरायली हमले
आपको बता दे कि, सीजफायर की घोषणा के बावजूद इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर अपनी बमबारी जारी रखी। इससे नाराज होकर ईरान ने न केवल सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होरमुज (Strait of Hormuz) को फिर से बंद कर दिया, बल्कि अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप भी लगाया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शहबाज शरीफ की पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा कर अमेरिका को चेतावनी दी कि वह “युद्ध और शांति” के बीच किसी एक को चुने, क्योंकि दोनों स्थितियां एक साथ नहीं चल सकतीं।
अमेरिका और इजरायल का साझा रुख
इस विवाद में तब नया मोड़ आया जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट दोनों ने एक सुर में कहा कि ईरान-अमेरिका शांति वार्ता (Iran-US Peace Talks) के दायरे में लेबनान शामिल नहीं है। नेतन्याहू ने साफ किया कि लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ उनकी कार्रवाई जारी रहेगी। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह सवाल पूछ रहा है कि क्या पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने जानबूझकर गलत जानकारी साझा की थी या उन्हें इस जटिल द्विपक्षीय समझौते (Bilateral Agreement) की पूरी जानकारी नहीं थी।
ईरानी संसद के स्पीकर का कड़ा बयान
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने इस समझौते को लगभग खत्म बताया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने बातचीत शुरू होने से पहले ही दस-सूत्रीय प्रस्ताव (Ten-Point Proposal) के तीन प्रमुख नियमों को तोड़ दिया है। गालिबाफ के अनुसार, पहला उल्लंघन लेबनान में हमले जारी रखना है, दूसरा ईरान के भीतर ड्रोन हमले की कोशिश और तीसरा ईरान के यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के अधिकार को स्वीकार करने से इनकार करना है। गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी भविष्य की वार्ता का अब कोई औचित्य नहीं बचा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल मध्य पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, बल्कि पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप प्रशासन इस बिगड़ती स्थिति को संभालने के लिए कोई नया प्रस्ताव सामने लाता है या फिर यह क्षेत्र एक बड़े युद्ध की ओर अग्रसर होगा।










