Iran Civil War 2026: ईरान में इस्लामिक शासन के खिलाफ भड़का जनाक्रोश अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। दशकों से निर्वासित जीवन जी रहे ईरान के क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी ने देश की जनता और विशेष रूप से सशस्त्र बलों के नाम एक भावुक और शक्तिशाली संदेश जारी किया है। पहलवी ने स्पष्ट शब्दों में सेना को याद दिलाया है कि उनका उत्तरदायित्व किसी राजनीतिक व्यवस्था या व्यक्ति के प्रति नहीं, बल्कि देश की मिट्टी और उसके नागरिकों के प्रति है। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए “मदद आने” की घोषणा की है।
क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी का सेना को कड़ा संदेश
अपने संबोधन में रेज़ा पहलवी ने ईरानी सेना को उनकी राष्ट्रीय जिम्मेदारी का एहसास कराया। उन्होंने कहा, “आप ईरान की राष्ट्रीय सेना हैं, किसी विशेष विचारधारा या इस्लामी गणराज्य की निजी फौज नहीं। आपका परम कर्तव्य अपने ही देशवासियों के जीवन की रक्षा करना है, उन पर गोलियां चलाना नहीं।” पहलवी ने आगे कहा कि दुनिया ने ईरानी जनता के साहस को देख लिया है और अब उस पर प्रतिक्रिया मिलनी शुरू हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस दमनकारी शासन और जनता के बीच अब ‘खून का सागर’ बह रहा है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
‘मदद आ रही है’: ट्रंप की सीधी चेतावनी और बातचीत से इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी उथल-पुथल के बीच एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे सरकारी इमारतों पर नियंत्रण करें और उन अधिकारियों के नाम नोट करें जो अत्याचार कर रहे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक निर्दोष नागरिकों की हत्याएं नहीं रुकतीं, अमेरिका ईरान के किसी भी अधिकारी से कोई बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने “मदद आ रही है” का वादा दोहराते हुए यह संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द ही किसी न किसी रूप में हस्तक्षेप कर सकता है।
सड़कों पर विद्रोह: महिलाओं ने हिजाब उतारकर जताया विरोध
ईरान के शिराज़, इस्फ़हान, कराज और अहवज़ जैसे प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारियों और सरकार समर्थकों के बीच हिंसक झड़पें हो रही हैं। इस विद्रोह की सबसे बड़ी ताकत महिलाएं बनकर उभरी हैं। हिजाब कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए महिलाओं ने सड़कों पर अपने हिजाब जलाए और बिना डर के डांस किया। यह दृश्य ईरान में बदलती सामाजिक चेतना और कट्टरपंथी नियमों के खिलाफ बढ़ते गुस्से का प्रतीक बन गया है। हजारों लोग सड़कों पर ‘तानाशाही का अंत’ करने के नारे लगा रहे हैं।
पहली बार सरकार ने स्वीकारी 2,000 मौतों की बात
ईरान की सरकार, जो अब तक मौतों के आंकड़ों को दबाती आई थी, उसने पहली बार स्वीकार किया है कि प्रदर्शनों के दौरान 2,000 से अधिक लोगों की जान गई है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि यह आंकड़ा वास्तविकता से बहुत कम है और वास्तविक मौतों की संख्या कहीं अधिक हो सकती है। जेलों में बंद लोगों और लापता युवाओं की संख्या भी हजारों में बताई जा रही है, जिससे मानवीय संकट गहरा गया है।
शासन को अस्थिर करने का संकल्प और दंड की चेतावनी
रेज़ा पहलवी और डोनाल्ड ट्रंप दोनों ने ही प्रदर्शनकारियों से आह्वान किया है कि वे अपराधियों के नाम याद रखें। उनका कहना है कि आने वाले समय में दमनकारी अधिकारियों को उनके कृत्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत कड़ी सजा दी जाएगी। पहलवी ने जनता से अपील की कि वे इस शासन को यह भ्रम पैदा न करने दें कि देश में जीवन सामान्य है। इस समय ईरान न केवल आंतरिक गृहयुद्ध के मुहाने पर खड़ा है, बल्कि वैश्विक शक्तियों के हस्तक्षेप के कारण एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है।
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