Iran Strait of Hormuz : ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज, अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहने पर तेहरान का दुनिया को कड़ा संदेश

अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी न हटाने के ऐलान के बाद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया है। दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका सैन्य बल से इस रास्ते को खुलवाएगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 18, 2026

Iran Strait of Hormuz : ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा गतिरोध एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) को फिर से बंद करने का बड़ा दावा किया है। ईरानी नेतृत्व का स्पष्ट कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी आर्थिक और सैन्य नाकाबंदी जारी रखेगा, तब तक इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह से नहीं खोला जाएगा। हालांकि, शुक्रवार को ईरान ने संकेत दिए थे कि सीजफायर की अवधि के दौरान व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता खुला रह सकता है, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने वैश्विक व्यापार जगत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह कदम सीधे तौर पर अमेरिकी कार्रवाइयों के विरोध में उठाया गया है।

ट्रंप की परमाणु शर्त और सैन्य हमले की खुली धमकी

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रुख को और सख्त कर लिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका की नाकाबंदी तब तक नहीं हटेगी, जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी बड़े और निर्णायक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि बुधवार तक समझौता धरातल पर नहीं उतरा, तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान सहयोग नहीं करता है, तो अमेरिका उसके यूरेनियम भंडार को अपने नियंत्रण में लेने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। सीजफायर को लेकर उन्होंने कहा कि इसे आगे बढ़ाना पूरी तरह अमेरिका की इच्छा पर निर्भर है।

ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स का आरोप: ‘समुद्री डकैती कर रहा है अमेरिका’

इस तनाव के बीच इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। ईरान ने अमेरिकी नाकाबंदी को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए इसे ‘समुद्री डकैती’ करार दिया है। IRGC का मानना है कि समुद्र में जहाजों को रोकना और ईरान के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाना सीधे तौर पर लूटपाट के समान है। हालांकि, कुछ व्यापारिक जहाजों को इस रास्ते से गुजरते हुए देखा गया है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तनावपूर्ण स्थिति के बीच कुल कितना समुद्री ट्रैफिक सुचारू रूप से संचालित हो पा रहा है।

शर्तों के साथ आवाजाही और हिज्बुल्लाह का कनेक्शन

ईरान के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से नहीं खोला गया है। यह केवल एक अस्थायी और सशर्त व्यवस्था है। ईरान के मुताबिक, सैन्य जहाजों और ‘दुश्मन ताकतों’ से जुड़े किसी भी जहाज को इस संकरे रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही, ईरान ने इस मामले को क्षेत्रीय राजनीति से भी जोड़ दिया है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि लेबनान में सक्रिय ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह पर दबाव बढ़ाया गया या उस पर कोई हमला हुआ, तो होर्मुज स्ट्रेट को लेकर मौजूदा ढील को तुरंत वापस ले लिया जाएगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों जरूरी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा धमनी मानी जाती है। ईरान और ओमान के बीच स्थित इस रास्ते से दुनिया के कुल तेल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। भौगोलिक रूप से, इसकी सबसे संकरी जगह लगभग 33 किलोमीटर चौड़ी है, लेकिन बड़े जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए उपलब्ध चैनल केवल 3-3 किलोमीटर चौड़ा है। ऐसे में यहां जरा सा भी तनाव पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा सकता है और वैश्विक सप्लाई चेन को ध्वस्त कर सकता है।

आगामी बुधवार की समय सीमा और संभावित बमबारी

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पूरे विवाद में ‘बुधवार’ की समय सीमा तय कर दी है। उनका कहना है कि बंदरगाहों की नाकेबंदी तो जारी रहेगी ही, लेकिन यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो अमेरिका फिर से हवाई हमले शुरू कर देगा। ट्रंप के इस बयान ने मध्य पूर्व में युद्ध की आहट को तेज कर दिया है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान झुककर समझौते के लिए तैयार होगा या फिर होर्मुज की लहरों पर बारूद की गंध एक नए वैश्विक संकट को जन्म देगी।

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