ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार का रुख और अधिक कठोर होता नजर आ रहा है। बुधवार को ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने संकेत दिए कि प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों पर जल्द सुनवाई पूरी कर फांसी की सजा दी जा सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मानवाधिकार संगठनों ने पहले ही आशंका जताई थी कि कई बंदियों को जल्द मौत की सजा सुनाई जा सकती है।
अमेरिकी चेतावनियों के बावजूद बयान
न्यायपालिका प्रमुख का यह बयान उस वक्त सामने आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। इसके बावजूद ईरानी नेतृत्व अपने कड़े फैसलों पर पीछे हटता नजर नहीं आ रहा, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है।
“हमें यह जल्दी करना होगा”
मोहसेनी-एजेई की यह टिप्पणी ईरानी सरकारी टेलीविजन द्वारा ऑनलाइन साझा किए गए एक वीडियो में सामने आई। उन्होंने कहा, “अगर हमें कोई कदम उठाना है, तो उसे तुरंत उठाना चाहिए। यदि हम इसमें दो या तीन महीने की देरी करते हैं, तो उसका वैसा प्रभाव नहीं रहेगा। जो भी करना है, उसे तेजी से करना होगा।” उनके इस बयान को गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई का सीधा संकेत माना जा रहा है।
प्रदर्शनों के दौरान भारी हिंसा
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए की गई सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 2,571 लोगों की मौत हो चुकी है। यह संख्या दशकों में ईरान में किसी भी आंदोलन या अशांति के दौरान हुई मौतों से कहीं अधिक बताई जा रही है। हालात इतने गंभीर हैं कि कई विशेषज्ञ इसे 1979 की इस्लामी क्रांति के समय की अराजकता से जोड़कर देख रहे हैं।
सुरक्षा बलों के हताहत और अंतिम संस्कार
बुधवार को ईरान ने प्रदर्शनों के दौरान मारे गए 100 सुरक्षा बल कर्मियों के सामूहिक अंतिम संस्कार की तैयारियां कीं। इसके साथ ही कई इलाकों में सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मी अब भी गश्त करते नजर आए। सरकार की ओर से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जिससे आम नागरिकों में भय का माहौल बना हुआ है।
आम लोगों में डर और असुरक्षा
तेहरान में फल और सब्जियां खरीद रही दो बच्चों की एक मां ने प्रतिशोध के डर से नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लोग बेहद डरे हुए हैं। उन्होंने कहा, “गोलीबारी और विरोध प्रदर्शनों की आवाजों ने हमें डरा दिया है। हमने सुना है कि बहुत से लोग मारे गए और कई घायल हैं। फिलहाल हालात शांत दिख रहे हैं, लेकिन स्कूल बंद हैं और मैं अपने बच्चों को फिर से स्कूल भेजने से डर रही हूं।”
प्रदर्शनकारियों के पास हथियार नहीं
36 वर्षीय अहमदरेजा तवाकोली ने एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत में बताया कि उन्होंने तेहरान में एक प्रदर्शन देखा, जहां अधिकारियों की ओर से हथियारों के इस्तेमाल ने उन्हें चौंका दिया। उन्होंने कहा, “लोग केवल अपनी बात रखने और विरोध जताने के लिए बाहर निकले थे, लेकिन जल्द ही पूरा इलाका युद्ध क्षेत्र जैसा बन गया। प्रदर्शनकारियों के पास कोई बंदूक नहीं थी, हथियार सिर्फ सुरक्षा बलों के पास थे।”
अंतरराष्ट्रीय चिंता और भविष्य की आशंका
ईरान में तेजी से बदलते हालात और फांसी की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यदि जल्द पारदर्शी जांच और निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई, तो स्थिति और भयावह हो सकती है। आने वाले दिनों में ईरान पर वैश्विक दबाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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