Iran Protests: ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ चल रहा जन-आक्रोश अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। देश के सभी 31 प्रांतों में फैली इस विद्रोह की आग ने न केवल तेहरान की सत्ता को हिला दिया है, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी हड़कंप मचा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट के बीच ईरानी जनता को संदेश दिया है कि “मदद आ रही है।” उनके इस बयान को तेहरान पर संभावित अमेरिकी सैन्य हमले के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ईरानी अधिकारियों के साथ किसी भी प्रकार की कूटनीतिक बातचीत की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है।
ट्रंप का कड़ा रुख: ‘ईरान अब नरक बन चुका है’
हाल ही में एक प्रेस वार्ता के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। जब उनसे ईरान में लोकतंत्र की बहाली के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह ईरान को फिर से एक स्वतंत्र और शांतिपूर्ण देश के रूप में देखना चाहते हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान के लोग लंबे समय से “नरक” जैसी परिस्थितियों में जी रहे हैं। उन्होंने अतीत को याद करते हुए कहा कि एक समय ईरान निवेश और संस्कृति के लिहाज से एक बेहतरीन स्थान था, लेकिन वर्तमान नेतृत्व ने इसे बर्बादी की कगार पर खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने हिंसा में मारे गए लोगों की बढ़ती संख्या पर दुख जताते हुए कहा कि हालांकि उनके पास सटीक आंकड़े नहीं हैं, लेकिन यह संख्या भयावह रूप से अधिक है।
रक्तपात के आंकड़े: 2,500 से अधिक लोगों की मौत
ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) द्वारा जारी डेटा के अनुसार, ईरान में स्थिति अत्यंत हृदयविदारक है। रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक 2,500 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें 2,403 प्रदर्शनकारी और 147 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। सबसे दुखद पहलू यह है कि इस हिंसा में 12 मासूम बच्चों की भी जान चली गई है। एजेंसी ने यह भी खुलासा किया कि लगभग 18,100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें छात्र, कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हैं। ईरानी सरकार की ओर से आधिकारिक आंकड़ों की चुप्पी इस आशंका को और बल देती है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
अमेरिका की सैन्य चेतावनी और ‘मजबूत विकल्प’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने तेहरान को चेतावनी दी है कि यदि सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग बंद नहीं किया गया, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं बना रहेगा। ट्रंप ने संकेत दिया कि उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम “बेहद मजबूत सैन्य विकल्पों” पर विचार कर रही है। अमेरिका का मानना है कि ईरानी शासन ने बर्बरता की सभी सीमाएं पार कर दी हैं। ट्रंप के समर्थकों का तर्क है कि यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से स्थापित सत्ता को उखाड़ फेंकने या उसे पूरी तरह कमजोर करने का सबसे बड़ा अवसर है।
ईरान की जवाबी धमकी: ‘इजरायल और अमेरिकी सेना होंगे निशाने पर’
वाशिंगटन के कड़े रुख के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक तेवर अपना लिए हैं। ईरान के संसदीय अध्यक्ष ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों की रक्षा के नाम पर सैन्य हस्तक्षेप किया, तो मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने और इजरायल उनके “वैध लक्ष्य” (Legitimate Targets) होंगे। ईरान इस पूरे विद्रोह को बाहरी ताकतों की साजिश करार दे रहा है, जबकि प्रदर्शनों की वास्तविक जड़ ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ का गिरता मूल्य और चरमराती अर्थव्यवस्था है।
खामेनेई सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती
यह विद्रोह अयातुल्ला अली खामेनेई के दशकों पुराने शासन के लिए अब तक की सबसे गंभीर चुनौती बन गया है। आर्थिक तंगी से शुरू हुआ यह गुस्सा अब पूर्ण राजनीतिक बदलाव की मांग में बदल चुका है। पूरे देश में इंटरनेट की पाबंदी और भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद, लोग सड़कों पर डटे हुए हैं। वैश्विक समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप अपनी ‘मदद’ के वादे को मिसाइलों के जरिए पूरा करेंगे या आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए तेहरान की कमर तोड़ेंगे।
Read More: ICC ODI Rankings: विराट कोहली ने फिर रचा इतिहास, 5 साल बाद बने नंबर-1










