Iran-US War: मसूद पेजेश्कियन का मुस्लिम देशों को बड़ा संदेश, बोले- ‘हम सब भाई हैं, एकजुट होकर खदेड़ें विदेशी ताकतें’

इजरायल और अमेरिका के हमलों से घिरे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने मुस्लिम जगत के नाम एक बड़ा संदेश जारी किया है। उन्होंने दावा किया कि दुश्मन इस्लामिक देशों में फूट डालना चाहते हैं। पेजेश्कियन ने एक नए 'इस्लामिक सुरक्षा ढांचे' का प्रस्ताव दिया है। क्या सऊदी अरब और मिस्र जैसे देश ईरान का साथ देंगे?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 21, 2026

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Iran-US War:  मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाया है। इजरायल और अमेरिका के साथ जारी युद्ध के 22वें दिन, ईद-उल-फित्र के पावन अवसर पर उन्होंने समस्त मुस्लिम राष्ट्रों के नाम एक भावुक पत्र लिखकर एकजुटता की अपील की है। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब ईरान अपनी नेतृत्व शक्ति और बुनियादी ढांचे को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहा है।

राष्ट्रपति पेजेश्कियन का पैगाम: “मुस्लिम देश हमारे भाई और पड़ोसी”

अपने आधिकारिक संदेश में राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने मुस्लिम जगत को संबोधित करते हुए उन्हें अपना ‘भाई’ और ‘प्रिय पड़ोसी’ बताया है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि ईरान का किसी भी इस्लामी राष्ट्र के साथ कोई विवाद नहीं है। उन्होंने लिखा, “आप हमारे भाई हैं और हमारा आपसे कोई मतभेद नहीं है। हमें यह समझना होगा कि हमारे बीच की दूरियों और विवादों का लाभ केवल ‘जायोनी इकाई’ (इजरायल) को मिलता है।” पेजेश्कियन ने ईद की मुबारकबाद देते हुए अल्लाह से दुआ की कि वे समस्त मुस्लिम उम्माह को एकता और शक्ति प्रदान करें ताकि पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) की शिक्षाओं पर चलते हुए वे विजयी हो सकें।

नेतृत्व का संकट: अयातुल्ला खामेनेई और शीर्ष अधिकारियों की मौत

ईरान के लिए पिछला एक महीना किसी त्रासदी से कम नहीं रहा है। 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इस अपूरणीय क्षति के बाद से पिछले 22 दिनों की जंग में ईरान के 40 से अधिक वरिष्ठ सैन्य कमांडर और राजनेता मारे जा चुके हैं। इस युद्ध ने ईरान की सत्ता संरचना और सैन्य कमान को हिलाकर रख दिया है, जिससे देश के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

जंग का मैदान और पलटवार: मिडिल-ईस्ट में मची तबाही

भले ही ईरान ने अपने शीर्ष नेतृत्व और बुनियादी ढांचे को खोया है, लेकिन उसने युद्ध के मैदान में हथियार नहीं डाले हैं। ईरानी सेना ने इजरायल और अमेरिका के सैन्य ठिकानों सहित ऊर्जा संयंत्रों पर भीषण ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इन हमलों ने पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। तेहरान का रुख स्पष्ट है कि वह अपनी जमीन पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, जिससे यह संघर्ष अब एक क्षेत्रीय महायुद्ध का रूप लेता जा रहा है।

जायोनी शासन पर निशाना और कूटनीतिक घेराबंदी

ईरानी राष्ट्रपति ने अपने संदेश के माध्यम से इजरायल और अमेरिका को सामूहिक रूप से ‘जायोनी शासन’ कहकर संबोधित किया है। उन्होंने मुस्लिम देशों को आगाह किया कि इजरायल और उसके पश्चिमी सहयोगी केवल मुस्लिम देशों के बीच फूट डालकर अपना एजेंडा सिद्ध करना चाहते हैं। पेजेश्कियन की इस ‘लेटर डिप्लोमेसी’ का उद्देश्य अरब और अन्य इस्लामी देशों को अपनी ओर करना है, ताकि इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय दबाव बनाया जा सके।

क्या सफल होगी एकजुटता की यह अपील?

युद्ध के 22 दिन बीत जाने के बाद भी शांति के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। एक ओर जहां ईरान अपने घावों को भरते हुए जवाबी कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह कूटनीतिक माध्यमों से मुस्लिम देशों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या खाड़ी देश और अन्य मुस्लिम राष्ट्र ईरान की इस भावुक अपील पर कोई ठोस प्रतिक्रिया देते हैं या वे इस युद्ध से दूरी बनाए रखना ही पसंद करेंगे।

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