Iran Oil Revenue : मिडल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष और अमेरिका-इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक अप्रत्याशित आर्थिक बढ़त हासिल कर ली है। जहां एक ओर युद्ध तबाही लेकर आता है, वहीं ईरान के लिए यह ‘आर्थिक जैकपॉट’ साबित हो रहा है। ब्लूमबर्ग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने कच्चा तेल बेचकर हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई की है। इस वित्तीय लाभ का सबसे बड़ा कारण यह है कि ईरान इस समय खाड़ी क्षेत्र का एकमात्र ऐसा प्रमुख निर्यातक देश बनकर उभरा है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से निर्बाध रूप से अपने तेल का निर्यात कर पा रहा है।
होर्मुज जलमार्ग पर दबदबा: वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा ईरान के हाथ में
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। युद्ध की स्थिति का फायदा उठाते हुए ईरान ने इस मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। रिपोर्ट बताती है कि ईरान अपने तेल टैंकरों को खार्ग द्वीप (Kharg Island) टर्मिनल से लोड कर रहा है और फारस की खाड़ी के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि ईरान अन्य खाड़ी देशों के शिपमेंट को इस मार्ग से गुजरने में बाधाएं उत्पन्न कर रहा है, जिससे बाजार में उसकी स्थिति और भी मजबूत हो गई है।
ब्रेंट क्रूड $100 के पार: ईरानी तेल की मांग और कीमतों में भारी उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने ईरान की तिजोरी भरने में बड़ी भूमिका निभाई है। युद्ध के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं। इसके दोतरफा फायदे ईरान को मिल रहे हैं। पहला, अंतरराष्ट्रीय मानक तेल महंगा होने से ईरान के तेल की वैल्यू बढ़ गई है। दूसरा, चीन जैसे बड़े खरीदारों को बेचे जाने वाले ईरानी तेल पर दिया जाने वाला ‘डिस्काउंट’ अब पिछले 10 महीनों के न्यूनतम स्तर पर आ गया है। यानी ईरान अब कम छूट पर महंगा तेल बेच रहा है, जिससे उसका मुनाफा कई गुना बढ़ गया है।
वित्तीय जीवनरेखा: प्रतिबंधों के बावजूद 16 लाख बैरल प्रति दिन का निर्यात
हैरानी की बात यह है कि अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों और सख्त प्रतिबंधों के बावजूद ईरान की वित्तीय जीवनरेखा सुरक्षित है। अनुमान है कि इस महीने भी ईरान का तेल निर्यात युद्ध पूर्व स्तर यानी लगभग 16 लाख बैरल प्रति दिन पर बना हुआ है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि अमेरिकी सरकार ने समुद्र में मौजूद कुछ ईरानी तेल टैंकरों पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सीनियर रिसर्च स्कॉलर रिचर्ड नेफ्यू के अनुसार, ऐसा लगता है कि अमेरिकी प्रशासन वर्तमान परिस्थितियों में वैश्विक तेल आपूर्ति बनाए रखने के लिए ईरान के निर्यात को पूरी तरह रोकने की प्राथमिकता खो चुका है।
कमाई का गणित: फरवरी के मुकाबले मार्च में राजस्व में भारी वृद्धि
ईरान की दैनिक कमाई के आंकड़े उसकी मजबूत होती अर्थव्यवस्था की गवाही दे रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में ईरान सरकार ने अपने मुख्य तेल ग्रेड ‘ईरानियन लाइट’ से प्रतिदिन लगभग $139 मिलियन की कमाई की है, जो फरवरी में $115 मिलियन प्रतिदिन थी। ब्रेंट तेल के मुकाबले ईरानी तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट घटकर मात्र $2.10 प्रति बैरल रह गया है, जो एक साल का सबसे निचला स्तर है। यह बढ़ा हुआ राजस्व ईरान को युद्ध के दौरान न केवल आर्थिक राहत दे रहा है, बल्कि उसे अपनी सैन्य और आंतरिक अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने में भी मदद कर रहा है।
युद्ध के साये में ईरान का आर्थिक पुनरुत्थान
कुल मिलाकर, मिडल ईस्ट का यह संघर्ष ईरान के लिए एक सुरक्षा कवच और आय का स्रोत दोनों बन गया है। जब तक होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बना रहेगा और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी, तब तक ईरान प्रतिबंधों के बावजूद अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने में सक्षम रहेगा। यह स्थिति अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक चुनौती पेश कर रही है।









