Middle East War: सऊदी से बहरीन तक तबाही, ईरान की मिसाइलों ने 7 देशों को बनाया निशाना

मिडिल ईस्ट में बारूद का ऐसा विस्फोट हुआ है जिसने पूरी दुनिया को थर्रा दिया है। इजरायल और अमेरिका के हमले से भड़के ईरान ने सऊदी अरब, बहरीन और कतर समेत सात देशों पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दी हैं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े पर हुए हमले ने क्या महायुद्ध की नींव रख दी है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 28, 2026

Middle East War: मध्य पूर्व के रणक्षेत्र में तनाव अब अपने चरम पर पहुँच गया है। ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए ‘ऑपरेशन फतह-ए-खैबर’ के तहत एक साथ सात देशों पर हमला कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ईरान की मिसाइलों की जद में न केवल इजराइल, बल्कि यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, जॉर्डन, कतर और बहरीन जैसे देश भी आए हैं। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से की गई उकसावे वाली गतिविधियों का ‘विनाशकारी’ जवाब है। इस हमले के बाद पूरे अरब प्रायद्वीप और खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल घने हो गए हैं।

अमेरिकी सैन्य शक्ति को भारी नुकसान

इस पूरे सैन्य अभियान का सबसे चौंकाने वाला पहलू इजराइल के अलावा अन्य छह देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस (US Bases) को निशाना बनाना है। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि वह क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति को मिटा देगा। ताजा खबरों के मुताबिक, ईरान ने एक साथ छह प्रमुख ठिकानों पर मिसाइलें गिराकर उन्हें ध्वस्त कर दिया है। यह हाल के दशकों में अमेरिका की सैन्य संपत्तियों पर हुआ सबसे बड़ा और घातक हमला माना जा रहा है। विशेष रूप से बहरीन और कतर से जो खबरें आ रही हैं, वे वाशिंगटन के लिए गहरी चिंता का विषय हैं।

बहरीन और कतर में मची तबाही

बहरीन से प्राप्त शुरुआती तस्वीरों और वीडियो में तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है। यहाँ स्थित अमेरिकी नेवल बेस (Naval Base) को ईरानी मिसाइलों ने पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है। इस बेस पर अमेरिका की नौसैनिक ताकत का एक बड़ा हिस्सा तैनात था। वहीं, कतर में स्थित अमेरिकी अड्डों पर हमले के दौरान स्थिति इतनी भयावह हो गई कि अमेरिकी प्रशासन को अपने सभी नागरिकों और सैन्य कर्मियों को तत्काल बंकरों में छिपने के निर्देश देने पड़े। हमलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि डिफेंस सिस्टम भी इन्हें रोकने में नाकाम नजर आए।

इजराइल की राजधानी तेल-अवीव पर मिसाइल वर्षा

ईरान ने अपने इस ऑपरेशन का पहला बड़ा प्रहार इजराइल की व्यावसायिक राजधानी तेल-अवीव पर किया। शहर के आसमान में दर्जनों मिसाइलें एक साथ देखी गईं, जिससे पूरे इजराइल में सायरन गूंज उठे। इस हमले के तुरंत बाद इजराइली सरकार ने देश में आपातकाल (Emergency) की घोषणा कर दी है। आयरन डोम और अन्य सुरक्षा प्रणालियाँ सक्रिय हैं, लेकिन मिसाइलों की भारी संख्या के कारण नुकसान का आकलन करना कठिन हो रहा है। नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को कहा गया है।

बहरीन के एयरबेस और अबू धाबी में अलर्ट

ईरान का दूसरा बड़ा निशाना बहरीन स्थित वह अमेरिकी बेस था, जहाँ अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक F-12 लड़ाकू विमान तैनात कर रखे थे। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने इस बेस को पूरी तरह कार्यात्मक रूप से अक्षम कर दिया है। इसके तुरंत बाद, ईरान ने अपना रुख यूएई की ओर किया और अबू धाबी स्थित अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला बोल दिया। इस हमले के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने देश भर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है।

खाड़ी देशों में सुरक्षा संकट और वैश्विक प्रतिक्रिया

ईरान की इस बहुआयामी कार्रवाई ने मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। सऊदी अरब, कुवैत और जॉर्डन जैसे देशों में भी सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हैं, क्योंकि वहां स्थित अमेरिकी रडार और रसद केंद्रों पर भी हमले की सूचनाएं हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और यह डर सता रहा है कि यह संघर्ष कहीं तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत न बन जाए। ईरान की ‘जवाबी कार्रवाई’ ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं के बाहर भी बड़े पैमाने पर युद्ध लड़ने की क्षमता रखता है।

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