Iran Israel Conflict: ईरान ने बंद किया ‘होर्मुज का द्वार’, दुनिया भर में गहरा सकता है तेल संकट!

ईरान ने बुधवार को दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा दो हफ्ते के संघर्ष-विराम की घोषणा के 24 घंटे के भीतर उठाया गया।

Iran Israel Conflict

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 9, 2026

Iran Israel Conflict: मध्य-पूर्व (Middle East) में शांति की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित दो हफ्ते के अस्थायी संघर्ष-विराम (Ceasefire) के 24 घंटे के भीतर ही ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का एलान कर दिया है। ईरान का यह कड़ा फैसला इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए ताज़ा हमलों की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

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क्यों बंद किया गया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ के मुताबिक, तेहरान ने यह कदम इजरायल द्वारा सीजफायर के कथित उल्लंघन के बाद उठाया है। इजरायल ने हाल ही में लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर भीषण बमबारी की, जिसमें 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई। ईरान का कहना है कि संघर्ष-विराम का मतलब सभी मोर्चों पर शांति होनी चाहिए। चूंकि इजरायल ने लेबनान और ईरान समर्थित मिलिशिया को निशाना बनाना बंद नहीं किया है, इसलिए ईरान ने समुद्री मार्ग पर टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह रोकने का फैसला किया है।

व्हाइट हाउस की चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सीजफायर के लिए यह शर्त रखी थी कि ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला रखना होगा। हालांकि, ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ का दावा है कि अमेरिका ने सैद्धांतिक रूप से इस जलमार्ग पर ईरान के नियंत्रण को स्वीकार कर लिया है। अब व्हाइट हाउस ने ईरान से मांग की है कि वह इस वैश्विक मार्ग को तुरंत खोले, क्योंकि इसकी नाकेबंदी से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।

‘सभी मोर्चों पर शांति’ की मांग

ईरानी संसद की सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने स्पष्ट किया कि लेबनान के लोगों को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा, “संघर्ष-विराम या तो सभी मोर्चों पर लागू होगा, या किसी भी मोर्चे पर नहीं।” ईरान चाहता है कि इजरायल न केवल ईरान बल्कि हिज्बुल्लाह और अन्य सहयोगियों पर भी हमले रोके। दूसरी ओर, इजरायल का तर्क है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है और वह अपनी सुरक्षा के लिए हिज्बुल्लाह पर हमले जारी रखेगा।

क्यों डर रही है दुनिया?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारसी खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा लेकिन सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण गलियारा है। दुनिया की कुल तेल और एलएनजी (LNG) सप्लाई का लगभग 20% (पाँचवा हिस्सा) इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस मार्ग के बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे भारत, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े आयातक देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।

क्या आगे खुलेगा रास्ता?

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से पहले, गुरुवार या शुक्रवार तक नाकेबंदी में कुछ ढील दी जा सकती है। हालांकि, जहाजों को वहां से गुजरने के लिए अभी भी ईरानी नौसेना की अनुमति लेनी होगी।

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