Iran Israel War : मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच ईरान के लिए एक बेहद बुरी खबर सामने आई है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य एक्शन में ईरान की सैन्य शक्ति की रीढ़ माने जाने वाले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के खुफिया प्रमुख, मेजर जनरल मजीद खादमी की मौत हो गई है। आज यानी 6 अप्रैल की सुबह हुए एक भीषण हमले में उन्हें निशाना बनाया गया। ईरान ने आधिकारिक तौर पर इस खबर की पुष्टि कर दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध की लपटें और तेज होने की आशंका बढ़ गई है।
IRGC ने टेलीग्राम पर साझा की ‘शहादत’ की जानकारी
ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई IRGC ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल के माध्यम से इस खबर को दुनिया के सामने रखा। पोस्ट में खादमी की मृत्यु को एक ‘आतंकवादी हमला’ करार देते हुए बताया गया कि 6 अप्रैल की सुबह अमेरिकी और इजरायली बलों ने घात लगाकर उन पर हमला किया। IRGC ने अपने बयान में खादमी को ‘शहीद’ बताते हुए कहा कि दुश्मन देश की कायरतापूर्ण हरकत ने ईरान के एक महान रणनीतिकार को उनसे छीन लिया है।
इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल कार्ट्ज का बड़ा दावा
इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन के बाद इजरायल की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कार्ट्ज ने एक संक्षिप्त लेकिन कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि इजरायल ने सफलतापूर्वक ईरान के खुफिया तंत्र के सबसे बड़े चेहरे को ढेर कर दिया है। इजरायल लंबे समय से ईरान की जासूसी गतिविधियों और आतंकी नेटवर्क पर नजर बनाए हुए था, और खादमी की मौत को उसकी सुरक्षा रणनीति की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
कौन थे मजीद खादमी और क्यों थे वे इतने खास?
मजीद खादमी को पिछले साल जून में ईरान की खुफिया एजेंसी का जिम्मा सौंपा गया था। उनकी नियुक्ति बेहद विषम परिस्थितियों में हुई थी, जब ईरान ने अपने पूर्व इंटेलिजेंस प्रमुख मोहम्मद काजमी और डिप्टी हसन मोहाकिक को एक इजरायली हमले में खो दिया था। खादमी ने ईरान के रक्षा मंत्रालय में खुफिया सुरक्षा प्रमुख के रूप में भी सेवाएं दी थीं। उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई का अत्यंत करीबी और वफादार माना जाता था। जासूसी और काउंटर-इंटेलिजेंस के क्षेत्र में उनका दशकों का अनुभव IRGC के लिए सुरक्षा कवच का काम करता था।
सीजफायर की सुगबुगाहट और शांति प्रस्ताव की शर्तें
एक तरफ जहाँ खादमी की मौत से तनाव चरम पर है, वहीं पर्दे के पीछे युद्धविराम (Ceasefire) की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने मिलकर एक शांति प्रस्ताव तैयार किया है। यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो अगले 15 से 20 दिनों में शांति बहाल हो सकती है। इस प्रस्ताव की मुख्य शर्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को खोलना और मिडिल ईस्ट में सभी सैन्य गतिविधियों पर रोक लगाना शामिल है।
प्रस्ताव पर ईरान का रुख और पाकिस्तान की भूमिका
ईरान ने इन शांति वार्ताओं पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि सीजफायर का यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से उन तक पहुँचा है। हालांकि, तेहरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वह किसी भी ‘अस्थायी सीजफायर’ के तहत सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलेगा। ईरान के इस बयान ने साफ कर दिया है कि भले ही बातचीत के दरवाजे खुले हों, लेकिन वह अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ेगा।










