Strait of Hormuz : होर्मुज की खाड़ी में जहाजों पर फायरिंग, ईरान ने फिर की एंट्री बंद, बढ़ेगा तेल का संकट

आज दोपहर ओमान के करीब होर्मुज की खाड़ी में ईरानी सेना ने एक बड़े तेल टैंकर पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। अमेरिकी नाकाबंदी के जवाब में ईरान ने अब इस रास्ते को पूरी तरह सील करने का फैसला किया है। क्या यह कदम दुनिया को भीषण मंदी और महंगे पेट्रोल की ओर धकेलेगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 18, 2026

Strait of Hormuz : दुनिया की जीवनरेखा कहे जाने वाले समुद्री मार्ग ‘होर्मुज की खाड़ी’ (Strait of Hormuz) में शनिवार को स्थिति विस्फोटक हो गई। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण इस जलमार्ग पर ईरान ने एक बार फिर से कड़ा सैन्य नियंत्रण लागू करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इसी बीच, समुद्री जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली संस्था ‘TankerTrackers’ ने एक भयावह रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज से गुजरने का प्रयास कर रहे कम से कम दो कमर्शियल जहाजों पर ओपन फायरिंग की गई है। इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय नौवहन क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और चालक दल की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं।

ईरान का सख्त रुख: बिना अनुमति के गुजरने पर पूर्ण प्रतिबंध

शनिवार सुबह ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के प्रवक्ता इब्राहिम जुलफागरी ने स्पष्ट किया कि अब इस मार्ग पर सैन्य निगरानी और नियंत्रण अभूतपूर्व रूप से कड़ा रहेगा। इस आक्रामक रुख के पीछे ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों और उसकी आर्थिक नीतियों को मुख्य कारण बताया है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने दो टूक चेतावनी दी है कि अब से इस रास्ते का उपयोग करने वाले प्रत्येक व्यापारिक जहाज को ईरानी नौसेना (IRGC) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। ईरान ने अमेरिका द्वारा उसके जहाजों को रोकने की कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ करार देते हुए कहा कि जब तक प्रतिबंध जारी रहेंगे, होर्मुज की नाकेबंदी भी जारी रहेगी।

शांति की उम्मीदें हुईं धूमिल: सीजफायर के बाद फिर गहराया संकट

दिलचस्प बात यह है कि यह तनाव उस समय चरम पर पहुंचा है जब दुनिया शांति की उम्मीद लगाए बैठी थी। 16 अप्रैल को इजरायल और लेबनान के बीच हुए संघर्ष विराम के बाद ऐसी खबरें आई थीं कि ईरान इस जलमार्ग को खोलने पर विचार कर रहा है। शनिवार सुबह करीब आठ तेल टैंकरों का एक काफिला सुरक्षित गुजरा भी था, जिससे वैश्विक बाजार को राहत के संकेत मिले थे। लेकिन चंद घंटों बाद ही ईरान के बदले हुए सैन्य तेवर और जहाजों पर गोलीबारी की घटनाओं ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। वर्तमान स्थिति को देखते हुए दर्जनों जहाज बीच समुद्र से वापस लौटते देखे गए हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव: तेल और गैस की आपूर्ति ठप

होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए किसी विनाशकारी झटके से कम नहीं है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे मानव इतिहास का ‘सबसे बड़ा तेल आपूर्ति संकट’ घोषित कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, इस नाकेबंदी के कारण प्रतिदिन लगभग एक करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल की आपूर्ति बीच रास्ते में ही लटकी हुई है। इसके अलावा, वैश्विक गैस आपूर्ति में 20 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) टूटने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, डीजल, सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल की आशंका जताई जा रही है।

भविष्य की अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई की आहट

ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ता यह गतिरोध केवल क्षेत्रीय संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर असर डालने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज की खाड़ी लंबे समय तक बंद रहती है, तो वैश्विक परिवहन लागत में वृद्धि होगी, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र इस संकट को टालने के लिए कोई प्रभावी हस्तक्षेप कर पाते हैं, या यह जलमार्ग एक बड़े वैश्विक युद्ध का अखाड़ा बनेगा।

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