Iran India Relations: महायुद्ध के बीच ईरान का बड़ा एलान, भारत के लिए खुला रहेगा होर्मुज का रास्ता

जहाँ पूरी दुनिया होर्मुज की नाकेबंदी से सहमी हुई है, वहीं ईरान ने भारत के लिए अपने दिल और रास्ते दोनों खोल दिए हैं। तेहरान ने आधिकारिक तौर पर भारत को भरोसा दिया है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों पर कोई आंच नहीं आएगी। क्या यह भारत की सफल विदेश नीति का सबसे बड़ा प्रमाण है?

Iran India Relations

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 13, 2026

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Iran India Relations: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच वैश्विक तेल संकट गहराता जा रहा है। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि, डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान ने जानबूझकर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ब्लॉक कर दिया है। डॉ. इलाही ने स्पष्ट किया कि ईरान कभी नहीं चाहता था कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग अवरुद्ध हो। उन्होंने कहा, “होर्मुज तकनीकी रूप से खुला है, लेकिन मौजूदा युद्ध और असुरक्षा के कारण कई जहाज वहां से गुजरने का जोखिम नहीं उठा पा रहे हैं।” उन्होंने विश्व के नेताओं से अपील की कि वे एकजुट होकर अमेरिकी राष्ट्रपति पर दबाव बनाएं ताकि इस ‘अन्यायपूर्ण युद्ध’ को तुरंत रोका जा सके।

भारत के लिए ‘सेफ पैसेज’: ईरान ने दोस्ती का दिया हवाला

भारत के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली के बयान से आई है। जब उनसे भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा, “हाँ, भारत हमारा पुराना और भरोसेमंद दोस्त है। आप अगले दो-तीन घंटों के भीतर ही इसका सकारात्मक असर देख लेंगे।” राजदूत फथाली ने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में भारत और ईरान के रणनीतिक हित एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। ईरान का यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब भारतीय रिफाइनरियां तेल की आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंता में थीं।

सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों की मजबूती पर जोर

ईरानी राजदूत ने दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों को दोस्ती और सहयोग का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ईरान और भारत के हित केवल व्यापारिक नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों की ‘आस्था और मूल्य’ भी एक जैसे हैं। मुश्किल समय में भारत द्वारा दिए गए समर्थन का विशेष उल्लेख करते हुए फथाली ने कहा कि युद्ध छिड़ने के बाद भारत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की मानवीय और कूटनीतिक मदद की है। ईरान इस संकट काल में भारत की भूमिका को एक सच्चे मित्र के रूप में देखता है और संबंधों को नए आयाम देने के लिए प्रतिबद्ध है।

वैश्विक ऊर्जा का केंद्र: क्यों महत्वपूर्ण है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’?

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ केवल एक समुद्री गलियारा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है। दुनिया के कुल तेल और गैस शिपमेंट का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण रास्ते से होकर गुजरता है। इस मार्ग में जरा सी भी रुकावट अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख देती है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। वर्तमान संघर्ष के कारण दुनिया भर की शिपिंग कंपनियां और सरकारें इस इलाके की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि यहां होने वाली किसी भी बड़ी घटना का असर सीधे वैश्विक पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है।

भारत की कूटनीतिक जीत और भविष्य की राह

ईरान द्वारा भारत को सुरक्षित रास्ता देने का आश्वासन भारतीय कूटनीति की एक बड़ी जीत मानी जा रही है। ऐसे समय में जब पश्चिमी देश ईरान पर दबाव बना रहे हैं, भारत ने संतुलन बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा की है। हालांकि, स्थिति अभी भी अस्थिर है और शिपिंग कंपनियां पूरी तरह से जोखिम मुक्त नहीं हुई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीनी स्तर पर भारतीय जहाजों की आवाजाही कितनी सुगम रहती है। यदि यह ‘सेफ पैसेज’ सफल रहता है, तो भारत को ऊर्जा संकट से बड़ी राहत मिल सकती है।

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