Ajay Pal Sharma Controversy: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। ताज़ा घटनाक्रम में, उत्तर प्रदेश के चर्चित ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। दक्षिण 24 परगना के फाल्टा पुलिस स्टेशन में दर्ज इस शिकायत ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। एक स्थानीय महिला ने आरोप लगाया है कि अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बलों के जवानों ने जबरन उनके घर में प्रवेश किया और वहां मौजूद महिलाओं के साथ अभद्रता व बदसलूकी की। चुनाव ड्यूटी पर तैनात एक वरिष्ठ पुलिस ऑब्जर्वर के खिलाफ इस तरह की एफआईआर दर्ज होना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
जहांगीर खान का कड़ा प्रहार: “सिर्फ CRPF के भरोसे नहीं बचोगे”
इस घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रत्याशी जहांगीर खान ने बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है। मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अजय पाल शर्मा को सीधी चुनौती दी। खान ने फिल्मी अंदाज में कहा, “अजय पाल शर्मा ने इस खेल की शुरुआत की है, लेकिन इसे खत्म हम करेंगे। पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त!” उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अधिकारी यह सोच रहे हैं कि वे कुछ सीआरपीएफ जवानों के साये में बच जाएंगे, तो यह उनकी भूल है। जहांगीर खान ने जनता की ताकत का हवाला देते हुए कहा कि अगर फाल्टा के लोग सड़कों पर उतर आए, तो केंद्रीय सुरक्षा बल उनके सामने टिक नहीं पाएंगे।
यूपी के ‘सिंघम‘ की बंगाल में एंट्री: अपराधियों में खौफ का दूसरा नाम
अजय पाल शर्मा की पहचान उत्तर प्रदेश पुलिस के एक ऐसे जांबाज अधिकारी के रूप में है, जिनके नाम से ही अपराधी कांपते हैं। 2011 बैच के इस आईपीएस अधिकारी के बारे में कहा जाता है कि वे जहां भी तैनात होते हैं, अपराधी अपनी जमानत रद्द करवाकर खुद जेल पहुंच जाते हैं। यूपी में ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के तौर पर मशहूर अजय पाल शर्मा ने दर्जनों खूंखार अपराधियों का सफाया किया है। उनकी फिटनेस और अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के कारण उन्हें ‘यूपी का सिंघम’ कहा जाता है। मूल रूप से पंजाब के लुधियाना के रहने वाले अजय पाल को बंगाल के संवेदनशील इलाकों में निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
फाल्टा में सियासी घमासान: सुरक्षा बल बनाम स्थानीय नेतृत्व
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र इस समय चुनावी हिंसा और बयानबाजी का केंद्र बन गया है। एक तरफ जहां चुनाव आयोग ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूपी के सबसे तेज-तर्रार अधिकारियों में से एक को तैनात किया है, वहीं टीएमसी इसे डराने-धमकाने की साजिश बता रही है। जहांगीर खान के बयानों ने सुरक्षा बलों और स्थानीय नेताओं के बीच टकराव को और बढ़ा दिया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, महिलाओं से बदसलूकी के आरोपों ने इस पूरे मामले को एक संवेदनशील मोड़ दे दिया है।
क्या निष्पक्ष होगा मतदान? चुनाव आयोग की बढ़ी चिंता
अजय पाल शर्मा के खिलाफ दर्ज शिकायत और टीएमसी नेताओं की खुली धमकियों ने चुनाव आयोग की रातों की नींद उड़ा दी है। बंगाल चुनाव हमेशा से ही अपनी संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं, और अब ‘सुपर कॉप’ की कार्यशैली पर उठे सवालों ने विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। आयोग इस बात की जांच कर रहा है कि क्या घर में घुसने के आरोप सही हैं या यह चुनावी दबाव बनाने की एक रणनीति है। आने वाले दिनों में फाल्टा और दक्षिण 24 परगना के अन्य इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जा सकती है, ताकि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की अनहोनी को टाला जा सके।
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