Indus Waters Treaty : सिंधु जल समझौते पर भारत के रुख से पाकिस्तान घबराया, दी सख्त धमकी

सिंधु जल समझौते को लेकर भारत के हालिया रुख ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। जवाब में पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया और सख्त चेतावनी दी है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव फिर चर्चा में आ गया है। आखिर भारत की अगली रणनीति क्या होगी और इस विवाद का क्षेत्रीय असर कितना बड़ा हो सकता है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Indus Waters Treaty

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 1, 2026

Indus Waters Treaty : सिंधु नदी जल समझौते (IWT) के भविष्य को लेकर पाकिस्तान की ओर से अब धमकियों और वैश्विक मंचों पर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा इस ऐतिहासिक संधि को निलंबित कर दिए जाने से पाकिस्तान भारी जल संकट के मुहाने पर खड़ा है। भारत द्वारा पानी की आपूर्ति रोके जाने के बाद से ही पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था, जो मुख्य रूप से सिंधु नदी प्रणाली पर आधारित है, चरमरा गई है। इसी दबाव के बीच मंगलवार को आयोजित एक ‘अंतरराष्ट्रीय सेमिनार’ में पाकिस्तान ने वैश्विक समुदाय को चेतावनी दी कि यदि यह समझौता विफल होता है, तो दुनिया की कोई भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था सुरक्षित नहीं रहेगी।

कृषि और बिजली उत्पादन पर गहराया संकट

पाकिस्तान की पूरी कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और बिजली उत्पादन तंत्र सिंधु नदी के जल पर टिका हुआ है। 1960 में हस्ताक्षरित इस संधि के निलंबन के बाद पाकिस्तान में जल संकट विकराल रूप ले चुका है। सम्मेलन में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने इस समझौते को मात्र जल बंटवारे का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता का आधार बताया। पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं का तर्क है कि भारत का यह कदम न केवल समझौते का उल्लंघन है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में सहयोग के ढांचे को भी कमजोर करता है। वे अब वैश्विक स्तर पर इस मुद्दे को उठाकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

समझौते के निलंबन को लेकर पाकिस्तान का कूटनीतिक रुख

पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने इसे ‘पाकिस्तान पर कभी कोई एहसान न होने’ वाली संधि करार दिया है। पाकिस्तान की वर्तमान सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय का मुद्दा बनाकर वैश्विक सहानुभूति हासिल करना चाहती है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान अब सिंधु घाटी सभ्यता से अपना जुड़ाव दिखाकर अपने जल अधिकारों को ‘पूर्व-इस्लामिक विरासत’ के नाम पर मजबूत करने का प्रयास कर रहा है, जो कि उसके दावों को एक नया आयाम देने की कोशिश है। पाकिस्तान सरकार के विभिन्न मंत्री और विशेषज्ञ इस मुद्दे पर कानूनी और कूटनीतिक तर्क तैयार करने में जुटे हैं।

‘वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरा’ बनी चेतावनी

सम्मेलन के दौरान पाकिस्तानी सीनेटर मुसादिक मलिक ने एक और बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सिंधु जल समझौते ने अतीत में दो परमाणु शक्तियों के बीच तीन युद्धों के बावजूद खुद को जीवित रखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह समझौता नहीं टिकता है, तो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निर्मित कोई भी अंतरराष्ट्रीय समझौता या वैश्विक आदेश सुरक्षित नहीं रहेगा। पाकिस्तानी पक्ष का यह तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय कानून की असली परीक्षा यह है कि वह मजबूत देशों के सामने कमजोर पक्षों की रक्षा कैसे करता है। इस सेमिनार का उद्देश्य ‘भारत द्वारा निलंबन’ के खिलाफ एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय जनमत तैयार करना है, ताकि भारत को पुनः जल प्रवाह बहाल करने के लिए मजबूर किया जा सके। पाकिस्तान का यह आक्रामक रुख उसकी विवशता को ही दर्शाता है।

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