Indore News: स्वच्छता में नंबर वन शहर इंदौर इन दिनों एक भयावह जल त्रासदी और उसके बाद शुरू हुई उग्र राजनीति का केंद्र बना हुआ है। शुक्रवार (2 जनवरी) को शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हुई मौतों के खिलाफ युवा कांग्रेस ने नगर निगम मुख्यालय पर ज़ोरदार प्रदर्शन किया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस को बल प्रयोग करते हुए 3 महिलाओं समेत 21 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना पड़ा।
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भागीरथपुरा दूषित जल संकट और प्रशासनिक विफलता
बताते चले किू, प्रदर्शनकारियों का सीधा आरोप है कि इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में फैली दूषित पेयजल त्रासदी पूरी तरह से प्रशासनिक लापरवाही और सत्तारूढ़ भाजपा के भ्रष्टाचार का परिणाम है। युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अनुसार, स्थानीय निवासियों ने पानी के गंदा होने की शिकायतें कई बार की थीं, लेकिन नगर निगम ने उन्हें नज़रअंदाज़ किया। कार्यकर्ताओं का दावा है कि यदि समय रहते प्रशासन जाग जाता, तो मासूमों और बुजुर्गों की जान नहीं जाती। यह जल जनित बीमारी अब एक बड़े मानवीय संकट में तब्दील हो चुकी है।
भारी मुआवजा और उच्च पदों से इस्तीफे की मांग
आपको बता दे कि, नगर निगम के सामने नारेबाजी कर रहे प्रदर्शनकारियों ने इस त्रासदी के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की। उनकी प्रमुख मांगों में मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा देना शामिल है। साथ ही, उन्होंने क्षेत्रीय विधायक और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तथा महापौर पुष्यमित्र भार्गव के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
‘घंटी’ और ‘घंटा’ विवाद के बीच अनोखा विरोध प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान एक दिलचस्प लेकिन विवादास्पद मोड़ तब आया जब कार्यकर्ता प्रतीकात्मक रूप से घंटी बजाकर प्रशासन को जगाने की कोशिश करने लगे। इसी बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से वह घंटी छीन ली, जिसे लेकर जमकर धक्का-मुक्की हुई। गौरतलब है कि हाल ही में कैलाश विजयवर्गीय द्वारा एक पत्रकार को दिए गए जवाब में ‘घंटा’ शब्द के इस्तेमाल पर विवाद हुआ था। चूंकि भागीरथपुरा विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है, इसलिए यह राजनीतिक विरोध और भी आक्रामक हो गया है। पुलिस उपायुक्त राजेश व्यास के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई ज़रूरी थी।
मृतकों के आंकड़ों पर विरोधाभास
इंदौर में इस डायरिया के प्रकोप (Diarrhea Outbreak) से हुई मौतों की संख्या को लेकर भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव जहाँ 10 मौतों की बात स्वीकार कर रहे हैं, वहीं राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में केवल 4 बुजुर्गों की मृत्यु की पुष्टि की है। इसके विपरीत, स्थानीय नागरिकों का दावा है कि एक 6 महीने के मासूम सहित कुल 15 लोग इस दूषित पानी के शिकार हुए हैं। आंकड़ों का यह अंतर प्रशासन की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान लगा रहा है।
इंदौर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल
शहर की जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जो शहर स्वच्छता में देश का नेतृत्व करता है, वहां पेयजल आपूर्ति की इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। सीवेज और पीने के पानी की लाइनों के आपस में मिलने की आशंका जताई जा रही है। युवा कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और शुद्ध जल की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।










