Swatantra Bhardwaj Case: स्वतंत्र भारद्वाज की कस्टडी पर नेहा बोरा का बड़ा बयान, पुलिस पर उठाए सवाल

स्वतंत्र भारद्वाज की पुलिस कस्टडी को लेकर AISA नेशनल प्रेसिडेंट नेहा बोरा ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कथित दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि आम लोगों और पत्रकारों पर कार्रवाई होती है, जबकि प्रभावशाली लोगों को कथित तौर पर संरक्षण मिलता है। नेहा बोरा ने स्वतंत्र भारद्वाज के बयान को लेकर बीजेपी समर्थकों को भी चेतावनी दी।

Swatantra Bhardwaj Case

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 6, 2026

Swatantra Bhardwaj Case: स्वतंत्र भारद्वाज की पुलिस कस्टडी और गिरफ्तारी को लेकर AISA की नेशनल प्रेसिडेंट नेहा बोरा का बयान सामने आया है। उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर पुलिस की कार्रवाई और कथित दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए हैं। नेहा बोरा के बयान के बाद स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थकों के बीच राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

देश में हिंसा को लेकर नेहा बोरा का बड़ा दावा

बताते चले कि, नेहा बोरा ने कहा कि देश में ऊपर से लेकर नीचे तक हिंसा का सामान्यीकरण होता दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, सड़क पर किसी व्यक्ति के साथ हिंसा करने को लेकर भी लोगों के मन में कानून का डर कम होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों से नजदीकी रखने वाले लोगों को कथित तौर पर किसी पर भी हमला करने की छूट मिल जाती है।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि, ये नेहा बोरा के आरोप और राजनीतिक टिप्पणी हैं, जिन पर संबंधित पक्ष का जवाब अलग हो सकता है।

दिल्ली पुलिस के सामने धरना और FIR को लेकर उठाए सवाल

नेहा बोरा ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ FIR और गिरफ्तारी के मुद्दे का जिक्र करते हुए दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दिल्ली पुलिस के सामने धरना देना पड़ा।

इसी के साथ उन्होंने दावा किया कि दूसरी ओर दो मुस्लिम पत्रकारों को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के एक कार्यक्रम से कथित तौर पर हिरासत में लिया गया और पुलिस स्टेशन में उनके साथ मारपीट की गई। नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद FIR दर्ज नहीं की गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती, इसलिए इन्हें नेहा बोरा के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

पुलिस कार्रवाई और कथित दोहरे मापदंड पर नेहा बोरा का निशाना

AISA अध्यक्ष ने कहा कि जनता को यह देखना चाहिए कि आम लोगों और पत्रकारों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई किस तरह होती है और दूसरी तरफ किन लोगों पर कथित तौर पर कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कैमरे के सामने हिंसा करने या किसी की जान लेने की बात स्वीकार करता है और फिर भी उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तो इससे व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि ऐसी स्थिति पुलिस और कानून-व्यवस्था की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े करती है। उनके मुताबिक, पुलिस को राजनीतिक आदेशों के बजाय कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति को उसकी राजनीतिक पहुंच के आधार पर अलग व्यवहार नहीं मिलना चाहिए।

‘हर उस आम नागरिक के लिए चेतावनी जो बीजेपी का समर्थन करता है’

नेहा बोरा ने स्वतंत्र भारद्वाज के कथित बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्र भारद्वाज ने कार्रवाई या जेल जाने की स्थिति में बाहर आने के बाद फिर से ‘इलाज’ करने की बात कही थी। इसी बयान के आधार पर नेहा बोरा ने इसे गंभीर चेतावनी के रूप में पेश किया।

उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति यह मानता है कि उसे सजा नहीं मिलेगी और बाहर आने के बाद वह कथित कार्रवाई दोहरा सकता है, तो यह केवल पीड़ित या उसके समर्थकों के लिए चेतावनी नहीं है।

बीजेपी समर्थकों को लेकर नेहा बोरा ने दी राजनीतिक चेतावनी

नेहा बोरा ने आगे कहा कि यह बीजेपी का समर्थन करने वाले आम नागरिकों के लिए भी चेतावनी है। उन्होंने दावा किया कि आज जिन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, भविष्य में उनके मुताबिक दूसरे लोग भी इसका शिकार हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को यह तय करना होगा कि समाज में कानून का राज चलेगा या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर लोगों के साथ अलग-अलग व्यवहार होगा। उनके इस बयान ने स्वतंत्र भारद्वाज मामले को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

स्वतंत्र भारद्वाज मामले में अब आगे की कार्रवाई पर नजर

स्वतंत्र भारद्वाज की पुलिस कस्टडी को लेकर सामने आए इस बयान के बाद अब मामले में आगे होने वाली कानूनी और पुलिस कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। वहीं, नेहा बोरा द्वारा लगाए गए पुलिस और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल यह मामला कानून-व्यवस्था, कथित हिंसा और राजनीतिक बयानबाजी के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।