Indore News: लगातार आठ बार देश का ‘सबसे स्वच्छ शहर’ होने का गौरव हासिल करने वाला इंदौर वर्तमान में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट से गुजर रहा है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण डायरिया का भीषण प्रकोप फैला है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस जलजनित बीमारी ने अब तक 8 लोगों की जान ले ली है, जबकि 1400 से अधिक नागरिक इसकी चपेट में आ चुके हैं। प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पेयजल की मुख्य लाइन में सीवेज का गंदा पानी मिलने के कारण यह संक्रमण जानलेवा स्तर तक पहुंच गया।
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पाइपलाइन लीकेज से मचा हाहाकार
बताते चले कि, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि संक्रमण का मुख्य कारण पाइपलाइन में हुआ रिसाव (लीकेज) है। जांच में पाया गया कि जिस स्थान पर पाइपलाइन लीक हुई, ठीक उसके ऊपर एक शौचालय बना हुआ था। इस वजह से शौचालय की गंदगी सीधे पेयजल आपूर्ति में घुल गई। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि मरम्मत कार्य पूरा कर पानी की सप्लाई फिर से शुरू कर दी गई है, लेकिन एहतियात के तौर पर स्थानीय निवासियों को पानी उबालकर पीने की सख्त हिदायत दी गई है।
प्रशासनिक मुस्तैदी और नई जल सुरक्षा SOP का निर्माण
इस त्रासदी की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने भागीरथपुरा का दौरा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे क्षेत्र की पाइपलाइन नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पानी के नए नमूने फिर से प्रयोगशाला भेजे गए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के कड़े निर्देशों के बाद, सरकार अब पूरे मध्य प्रदेश के लिए पेयजल सुरक्षा को लेकर एक ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) तैयार कर रही है, ताकि भविष्य में अन्य किसी शहर में पाइपलाइन और सीवेज के मिलन जैसी गंभीर चूक न हो।
डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग और अस्पतालों में मरीजों की वर्तमान स्थिति
स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्र में युद्ध स्तर पर राहत कार्य चला रही हैं। हाल ही में किए गए सर्वे के अनुसार, 1714 परिवारों के लगभग 8571 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इस दौरान 338 नए लोगों में उल्टी और दस्त के प्रारंभिक लक्षण मिले, जिनका उपचार उनके घर पर ही शुरू किया गया है। अब तक कुल 272 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 71 को डिस्चार्ज कर दिया गया है। फिलहाल 201 लोगों का इलाज चल रहा है, जिनमें से 32 मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू (ICU) में निगरानी में रखा गया है।
इंदौर मॉडल और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर उठते सवाल
इस हृदयविदारक घटना ने इंदौर की विश्वप्रसिद्ध स्वच्छता प्रणाली और ‘इंदौर मॉडल’ पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि केवल कचरा प्रबंधन और सतही सफाई में नंबर एक आना पर्याप्त नहीं है। इस आपदा ने यह सबक दिया है कि नगर निगम को स्वच्छता की रैंकिंग से ऊपर उठकर भूमिगत जल स्रोतों की निरंतर मॉनिटरिंग और पुरानी जर्जर पाइपलाइनों के रखरखाव पर विशेष ध्यान देना होगा। जल सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मजबूती ही भविष्य में ऐसी महामारियों को रोकने का एकमात्र उपाय है।
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