Indira Ekadashi 2026: आश्विन मास की इंदिरा एकादशी कब? नोट करें मुहूर्त और पारण विधि

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को संकटों को दूर करने और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है। आज फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। रविवार के दिन पड़ने के कारण इसे 'रवि प्रदोष व्रत' कहा जाता है, जो स्वास्थ्य लाभ और सुख-समृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी है।

Indira Ekadashi 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 1, 2026

Indira Ekadashi 2026: सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं और सभी का अपना महत्व होता है। लेकिन एकादशी व्रत को बेहद ही खास माना जाता है, जो कि हर माह में दो बार पड़ती है। ऐसे साल में कुल 24 एकादशी व्रत किए जाते हैं लेकिन इंदिरा एकादशी को बेहद ही खास माना जाता है जो कि आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करते हैं और व्रत आदि भी रखते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा पाठ और व्रत करने से मनोकामना पूरी हो जाती है और पितरों को वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। ऐसे में हम आपको इंदिरा एकादशी से जुड़ी जानकारी प्रदान कर रहे हैं तो आइए जानते हैं।

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इंदिरा एकादशी का महत्व

Indira Ekadashi 2026
आश्विन मास की इंदिरा एकादशी कब?

पंचांग के अनुसार इंदिरा एकादशी पितृपक्ष के दौरान आती है यह अन्य एकादशियों से अधिक फलदायी मानी जाती है, क्योंकि इसका सीधा संबंध पूर्वजों की मुक्ति से है। अगर किसी जातक के पूर्वज जाने अनजाने में हुए पापों के कारण यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं, तो इस एकादशी व्रत कर उसका फल पितरों को दान कर उन्हें मोक्ष मिलता है। इस पावन दिन विधिवत पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे घर में सुख शांति और समृद्धि का वास होता है।

एकादशी की तारीख और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 6 अक्टूबर की रात 2 बजकर 7 मिनट पर होगा और इसका समापन 7 अक्टूबर को मध्यरात्रि 12 बजकर 34 मिनट पर हो जाएगा। ऐसे में इस बार इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर दिन मंगलवार को मनाया जाएगा।

पारण का मुहूर्त और सरल विधि

एकादशी व्रत का पूर्ण फल तब मिलता है जब उसका पारण सही समय पर किया जाए। ऐसे में पारण तिथि 7 अक्टूबर दिन बुधवार को किया जाएगा और इसका शुभ समय 6 बजकर 17 मिनट से 8 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।

आपको बता दें कि व्रत खोलने से पहले साधक को सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए। पारण करने से पहले ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अपनी इच्छा अनुसार धन का दान कर उनका आशीर्वाद लें। दान के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का समापन करें।

व्रत के जरूरी नियम

दशमी तिथि की रात ही सात्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह जल्दी उठकर व्रत का संकल्प करें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं और उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल और फल अर्पित करें। इस पावन दिन पर पितरों के निमित्त तर्पण करना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा दिनभर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का मन ही मन जाप करें और रात्रि जागरण करें। माना जाता है कि इस विधि से पूजा पाठ करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और कष्टों का निवारण हो जाता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।