Indian Rupee Record Low: रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर, पहली बार 94 के पार, डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड गिरावट

आज विदेशी मुद्रा बाजार खुलते ही कोहराम मच गया। रुपया 41 पैसे टूटकर 93.94 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुँच गया और कुछ ही घंटों में 94 की लक्ष्मण रेखा भी लांघ गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और युद्ध की आहट ने निवेशकों को डरा दिया है। क्या यह सिर्फ शुरुआत है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 23, 2026

Indian Rupee Record Low: भारतीय मुद्रा बाजार के लिए सोमवार का दिन बेहद निराशाजनक रहा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 94 के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया। कारोबार के अंत में रुपया 50 पैसे की भारी गिरावट के साथ 94.03 (अस्थायी) के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट ने निवेशकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी फंडों की लगातार निकासी ने भारतीय करेंसी की कमर तोड़ दी है। डॉलर की मजबूती और घरेलू शेयर बाजार की मंदी ने आग में घी डालने का काम किया है।

ईरान युद्ध का असर: 28 फरवरी से अब तक 3.25% से ज्यादा टूटा रुपया

मुद्रा बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में रुपया 93.84 पर खुला था, लेकिन दिन भर की बिकवाली ने इसे 94.03 के स्तर पर धकेल दिया। गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार को भी रुपया 64 पैसे कमजोर होकर 93.53 पर बंद हुआ था। जब से पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध की आहट शुरू हुई है, तब से रुपए में डॉलर के मुकाबले 3.25 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। 28 फरवरी को रुपया 91.08 के स्तर पर था, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव ने इसे महज कुछ ही हफ्तों में 3 रुपए से ज्यादा कमजोर कर दिया है।

विशेषज्ञों की राय: कच्चे तेल का दबाव और विदेशी निवेशकों की निकासी

मीराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कमजोर घरेलू बाजारों ने रुपए को अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँचा दिया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालने के कारण रुपए पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में USD-INR स्पॉट प्राइस 93.60 से 94.40 रुपए की रेंज में ट्रेड कर सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले हस्तक्षेप से रुपए को कुछ सहारा मिलने की उम्मीद है।

शेयर बाजार में कोहराम: सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट

रुपए की कमजोरी का सीधा असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। सोमवार को सेंसेक्स 1,836.57 अंक (2.46%) गिरकर 72,696.39 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 484.30 अंक (2.10%) की गिरावट के साथ 22,630.20 के स्तर पर आ गया। शेयर बाजार में इस बड़ी गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने शुक्रवार को अकेले 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो बाजार में घबराहट का स्पष्ट संकेत है। डॉलर इंडेक्स भी 0.14 प्रतिशत बढ़कर 99.78 पर ट्रेड कर रहा है, जो डॉलर की वैश्विक मजबूती को दर्शाता है।

विदेशी मुद्रा भंडार में कमी: भारत के भंडार से घटे 7 अरब डॉलर

मुद्रा बाजार की अस्थिरता के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़ी खबरें भी चिंताजनक हैं। आरबीआई (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, 13 मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.052 अरब डॉलर घटकर 709.759 अरब डॉलर रह गया है। भंडार में यह कमी रुपए को संभालने के लिए किए गए हस्तक्षेप या वैश्विक संपत्ति मूल्यों में बदलाव के कारण हो सकती है। कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फिलहाल 113.4 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है, जो भारत जैसे आयात प्रधान देश के लिए चालू खाता घाटे (CAD) की चुनौती बढ़ा सकता है।

वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की चिंता

रुपए का 94 के स्तर को पार करना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौतीपूर्ण संकेत है। आयात महंगा होने से देश में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, खासकर ईंधन और इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के दामों में वृद्धि हो सकती है। बाजार की नजर अब अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर टिकी है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तो रुपए की गिरावट का यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।

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