
Indian Railway Rules: भारतीय रेलवे ने ट्रेनों और रेलवे परिसरों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त आदेश जारी किया है। अब सफर के दौरान मोबाइल फोन पर तेज आवाज में गाने, वीडियो या रील्स देखना यात्रियों को काफी महंगा पड़ सकता है। नियमों का उल्लंघन करने पर भारी आर्थिक जुर्माने के साथ-साथ जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। दक्षिणी रेलवे द्वारा इस संबंध में 6 अक्तूबर को एक आधिकारिक परिपत्र जारी किया गया है, जिसके तहत यात्रियों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि तेज आवाज में मोबाइल का इस्तेमाल करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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क्या है रेलवे का नया नियम और प्रावधान?

दक्षिणी रेलवे के इस नए परिपत्र के अनुसार, यदि कोई यात्री ट्रेन के भीतर या रेलवे परिसरों में अपने मोबाइल फोन के स्पीकर ऑन करके गाने सुनता है, वीडियो चलाता है या बहुत ऊंची आवाज में बातें करता है, तो उसे दोषी माना जाएगा। रेलवे प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ऐसी हरकतों से अन्य यात्रियों की शांति में खलल पड़ता है।
इस नए नियम के तहत दोषी पाए जाने वाले यात्रियों पर 1,000 रुपये तक का नकद जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, कानून में किए गए संशोधनों के आधार पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए छह महीने तक की जेल या जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान भी शामिल किया गया है। उत्तरी रेलवे और पश्चिमी रेलवे जोन ने भी ट्रेनों में मोबाइल फोन के इस तरह के व्यापक दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का पूरा मन बना लिया है। उत्तरी रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे एक बेहद सही और जरूरी कदम बताया है, उनका कहना है कि यात्रियों को अनुशासन में रहने और हेडफोन या इयरफोन का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना बेहद आवश्यक हो गया है।
इस सख्त नियम की आवश्यकता क्यों पड़ी?
रेलवे को पिछले कुछ समय से ‘रेल मदद’ शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से लगातार ऐसी कई शिकायतें मिल रही थीं। खास तौर पर एसी (AC) कोचों और लंबी दूरी की गाड़ियों में सह-यात्रियों द्वारा मोबाइल पर तेज आवाज में संगीत बजाने या वीडियो देखने की आदत से लोग बेहद परेशान थे।
यात्रियों की लगातार मिल रही शिकायतों में कहा गया था कि इससे सफर के दौरान मानसिक शांति भंग होती है और भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों के मुताबिक, देश में मोबाइल इंटरनेट की सुलभ और व्यापक पहुंच के बाद से यह समस्या काफी तेजी से बढ़ी है। अब सार्वजनिक और बंद जगहों पर भी स्पीकर मोड पर वीडियो चलाना एक आम बात बन गई है, जिस पर लगाम लगाने के लिए इस तरह की तत्काल व्यवस्था की सख्त जरूरत महसूस की जा रही थी। रेलवे जोन अब सार्वजनिक संबोधन (PA) प्रणालियों के जरिए भी लगातार यात्रियों को इसके प्रति जागरूक करने का काम करेंगे।
नियम के क्रियान्वयन पर उठ रहे हैं सवाल

भले ही रेलवे प्रशासन ने इस दिशा में कड़ा रुख अपना लिया है, लेकिन इसके प्रभावी रूप से लागू होने को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं। पश्चिमी रेलवे के अधिकारियों का मानना है कि नए कानूनी संशोधनों के बाद इस समस्या से सख्ती से निपटा जा सकता है, वहीं यात्री संगठनों ने इसके जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं।
नागपुर स्थित रेलवे यात्री संघ के प्रतिनिधि बसंत कुमार शुक्ला ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि केवल कागजी परिपत्र जारी करने से धरातल पर बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों और ट्रेन टिकट परीक्षकों (TTE) की भारी कमी का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि अमले की इसी कमी के कारण पहले से ही अनधिकृत प्रवेश, बर्थ पर अवैध कब्जा और स्वच्छता जैसी बुनियादी शिकायतें अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। ऐसे में देखना यह होगा कि रेलवे इस नियम को कितनी सख्ती से और सफलतापूर्व जमीन पर उतार पाता है।
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