Wealth Inequality in India : भारत में आर्थिक असमानता को लेकर ‘सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी’ ने एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट ‘वेल्थ ट्रैकर इंडिया 2026’ जारी की है। 1 अप्रैल 2026 को पेश की गई इस रिपोर्ट ने देश के विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, भारत के केवल 1,688 सबसे अमीर परिवारों के पास कुल मिलाकर 166 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। यह रकम भारत की कुल जीडीपी (GDP) के लगभग 50 प्रतिशत के बराबर है। यह रिपोर्ट इशारा करती है कि देश में धन का संकेंद्रण कुछ ही हाथों में सिमट कर रह गया है, जो अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक संकेत है।
औपनिवेशिक दौर की याद दिलाती मौजूदा आर्थिक असमानता
रिपोर्ट में इस विषमता की तुलना ब्रिटिश औपनिवेशिक काल से की गई है, जब संसाधनों पर मुट्ठी भर लोगों का कब्जा था। ‘Tax the Top’ अभियान के तहत जारी इस शोध में कहा गया है कि मौजूदा ढांचा समाज के निचले तबके को ऊपर लाने में विफल रहा है। 2019 से 2025 के बीच की अवधि को देखें तो ऊपरी वर्ग की संपत्ति में रॉकेट की गति से इजाफा हुआ है, लेकिन इसी दौरान देश की आधी से ज्यादा आबादी यानी निचले 50 प्रतिशत लोगों की आर्थिक स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं देखा गया। यह स्थिति सामाजिक संतुलन बिगाड़ने की क्षमता रखती है।
आंकड़ों का गणित: टॉप 1% बनाम निचले 50% लोग
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि भारत के सबसे अमीर 1 प्रतिशत लोगों का देश की कुल 40 प्रतिशत से अधिक संपत्ति पर नियंत्रण है। इसके विपरीत, आबादी का निचला 50 प्रतिशत हिस्सा कुल राष्ट्रीय आय के मात्र 15 प्रतिशत पर अपना जीवन बसर कर रहा है। पिछले छह वर्षों में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति रखने वाले अमीरों की संख्या में 77 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। इन अति-अमीरों की कुल संपत्ति 31 लाख करोड़ से बढ़कर 88 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो कुल 227 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाती है।
कॉर्पोरेट दिग्गजों की दौलत में 400% का तूफानी उछाल
देश के पांच सबसे बड़े औद्योगिक घरानों—अंबानी, अडानी, जिंदल, मित्तल और नादर की संपत्ति में 2019 से 2025 के बीच अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इन परिवारों की संयुक्त संपत्ति इस दौरान करीब 400 प्रतिशत बढ़ी। मुकेश अंबानी की संपत्ति जहां 153 प्रतिशत बढ़ी, वहीं गौतम अडानी की दौलत में 625 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया। साल 2019 में इन पांचों परिवारों के पास 6.68 लाख करोड़ रुपये थे, जो 2025 तक बढ़कर 26.54 लाख करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े तक पहुँच गए हैं। यह दिखाता है कि महामारी और वैश्विक मंदी के बावजूद भारत के अरबपति और अमीर होते गए।
वेल्थ टैक्स: क्या अमीरों पर कर लगाने से मिटेगी गरीबी?
सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी ने इस असमानता को पाटने के लिए एक क्रांतिकारी सुझाव दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि इन 1,688 अति-धनी परिवारों पर 2 से 6 प्रतिशत का ‘प्रोग्रेसिव वेल्थ टैक्स’ और एक-तिहाई ‘इनहेरिटेंस टैक्स’ (उत्तराधिकार कर) लगाया जाए, तो सरकार हर साल लगभग 10.63 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटा सकती है। इतनी बड़ी राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं में करके गरीब तबके के जीवनस्तर को सुधारा जा सकता है और देश में संसाधनों का न्यायोचित वितरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
Read more : UP Politics: बाहुबली बृजभूषण की बेटी शालिनी सिंह की होगी राजनीति में एंट्री? ‘परिवारवाद’ पर दिया बेबाक जवाब










