India US Trade Deal: कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और भारत-अमेरिका के हालिया ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील में भारतीय किसानों, कृषि और डेटा प्राइवेसी के अधिकारों की अनदेखी की गई है। सुरजेवाला ने सीधे सवाल किया कि क्या भारत आत्मनिर्भर भारत का सपना छोड़कर अमेरिका निर्भर बन रहा है।
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किसानों और कृषि हितों पर गंभीर असर
सुरजेवाला का कहना है कि इस ट्रेड एग्रीमेंट में किसानों और जमीन मालिकों के हितों की बलि दी गई है। उन्होंने बताया कि अमेरिका प्रोसेस्ड फलों और अन्य अतिरिक्त प्रोडक्ट्स के लिए भारत ने अपने घरेलू बाजार खोला है, जिससे भारतीय किसानों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मौजूदा समय में 334 मिलियन डॉलर की कॉटन इम्पोर्ट ने देश में कीमतों में गिरावट लाकर किसानों को नुकसान पहुँचाया है। वहीं, उन्होंने पूछा कि क्या इस समझौते में दूध, गेहूं और डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे अहम घरेलू उत्पाद शामिल हैं, और यदि हैं तो किस प्रकार के टैरिफ नियम लागू होंगे।
डिजिटल फ्रीडम और डेटा प्राइवेसी पर सवाल
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सुरजेवाला ने यह भी आरोप लगाया कि इस डील में डिजिटल फ्रीडम और डेटा प्राइवेसी को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भारतीय हितों की सुरक्षा के बजाय अपनी व्यापक रणनीति में समझौता किया है। उनका सवाल है कि क्या यह मजबूत सरकार है या वास्तव में कमजोर सरकार, जो अपने नागरिकों के डेटा और स्वतंत्रता की रक्षा करने में असफल रही।
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विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया और असंतोष
सुरजेवाला ने यह भी बताया कि जब भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बारे में विदेश मंत्री से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे दूसरे विभाग का मामला बता दिया। सुरजेवाला ने कहा कि अगर विदेश मंत्री को भी डील की पूरी समझ नहीं है, तो आम नागरिकों और मीडिया को संतोषजनक जवाब मिलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार खुला
सुरजेवाला के अनुसार यह डील भारत में अमेरिका के इंडस्ट्रियल सामान, सूखे मेवे और प्रोसेस्ड फलों के लिए बाजार खोलने पर सहमत है। इसके चलते भारत में घरेलू उत्पादों की प्रतिस्पर्धा और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने केंद्र से सवाल किया कि क्या यह समझौता भारतीय लोगों की रोज़मर्रा की आमदनी और स्थानीय उद्योगों के हितों के अनुरूप है।
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