India US Trade Deal: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोरदार हमला बोला है। शनिवार को जारी एक बयान में उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौतों को लेकर जो संयुक्त बयान सामने आया है, उससे यह साफ हो गया है कि व्यक्तिगत संबंधों और ‘गले मिलने वाली कूटनीति’ से भारत को कोई ठोस आर्थिक लाभ नहीं हुआ है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिखाई जाने वाली घनिष्ठता का असर धरातल पर भारत के पक्ष में नजर नहीं आ रहा है।
“हाउडी मोदी” पर भारी पड़ा “नमस्ते ट्रंप”: जयराम का राजनीतिक कटाक्ष
जयराम रमेश ने अमेरिका के पूर्व और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को जोड़ते हुए कटाक्ष किया कि “हाउडी मोदी” कार्यक्रम की चमक पर “नमस्ते ट्रंप” के कड़े फैसले भारी पड़ गए हैं। गौरतलब है कि ये दोनों कार्यक्रम तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले कार्यकाल के दौरान आयोजित किए गए थे, जिसमें एक ह्यूस्टन में हुआ था और दूसरा अहमदाबाद में। रमेश ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रसिद्ध गाने की पंक्तियों का उपयोग कर कहा कि अब “दोस्त-दोस्त न रहा”। उनका इशारा इस ओर था कि भारत ने अमेरिका के साथ मित्रता निभाने के लिए अपने महत्वपूर्ण आर्थिक हितों के साथ समझौता कर लिया है।
रूसी तेल आयात पर संकट: अमेरिकी दंडात्मक शुल्क की चेतावनी
कांग्रेस नेता ने ‘एक्स’ पर साझा की गई अपनी पोस्ट में गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संयुक्त वक्तव्य से संकेत मिलते हैं कि भारत अब रूस से तेल आयात नहीं कर पाएगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि भारत प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखता है, तो उस पर 25 प्रतिशत का भारी दंडात्मक शुल्क (Punitive Duty) लगाया जा सकता है। रमेश के अनुसार, यह भारत की संप्रभु विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा पर एक बड़ा प्रहार है, जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।
भारतीय किसानों के हितों पर चोट: आयात शुल्क में कटौती का मुद्दा
समझौते की शर्तों पर सवाल उठाते हुए जयराम रमेश ने कहा कि भारत सरकार ने अमेरिकी किसानों को फायदा पहुँचाने के लिए आयात शुल्क में भारी कटौती करने का निर्णय लिया है। उन्होंने दावा किया कि यह फैसला भारतीय किसानों की कीमत पर लिया गया है। रमेश के अनुसार, अमेरिका से भारत का वार्षिक आयात भविष्य में तीन गुना तक बढ़ जाएगा। इससे भारत का वह व्यापार अधिशेष (Trade Surplus), जो वस्तुओं के व्यापार में लंबे समय से बना हुआ था, पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। साथ ही, उन्होंने आईटी सेवाओं के निर्यात को लेकर बनी अनिश्चितता पर भी चिंता जताई।
अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा: 500 अरब डॉलर की बड़ी योजना
दूसरी ओर, भारत और अमेरिका ने शनिवार को आधिकारिक तौर पर एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने की घोषणा की है। इस नए ढांचे के तहत अमेरिका, भारत पर लगाए जाने वाले शुल्कों को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ है। बदले में भारत, अमेरिका से आने वाले औद्योगिक सामानों, मेवों, ताजे फलों, सोयाबीन तेल और शराब जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त करेगा। समझौते के तहत भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों, विमानों और तकनीकी सामानों सहित लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुएं खरीदने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है।
निर्यात शुल्क और तकनीकी क्षेत्र में चुनौतियां
जयराम रमेश ने संयुक्त बयान का हवाला देते हुए यह भी जोड़ा कि भारत द्वारा अमेरिका को निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर पहले के मुकाबले अधिक शुल्क लगाया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि व्यापारिक समझौतों में केवल तस्वीरें खिंचवाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि देश के आर्थिक हितों की रक्षा करना प्राथमिकता होनी चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह समझौता पूरी तरह से अमेरिकी शर्तों के अनुरूप दिखता है, जिससे भारत की विनिर्माण क्षमता और सेवा क्षेत्र को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है।










