India-US Trade Deal: जयशंकर और ट्रंप प्रशासन के बीच ऐतिहासिक वार्ता; व्यापारिक रिश्तों में आएगी नई ऊष्मा, चीन की बढ़ी टेंशन

वाशिंगटन से आई बड़ी खबर! विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ट्रंप प्रशासन के बीच हुई वार्ता ने व्यापारिक रिश्तों की बर्फ पिघला दी है। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया है। क्या यह चीन की आर्थिक घेराबंदी की शुरुआत है? जानें इस ऐतिहासिक डील के अंदरूनी राज।

India-US Trade Deal:

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 4, 2026

India-US Trade Deal: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मंगलवार, 4 फरवरी 2026 को अपनी तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा का दमदार आगाज किया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता संभालने के बाद यह किसी भी वरिष्ठ भारतीय अधिकारी का पहला बड़ा वाशिंगटन दौरा है। दौरे के पहले ही दिन जयशंकर ने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ गहन चर्चा की। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाना है। यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक ट्रेड डील पर सहमति बनी है।

ट्रेड डील और टैरिफ में कटौती का नया दौर

जयशंकर की यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई हालिया बातचीत के ठीक बाद हो रही है। इस बातचीत के परिणामस्वरूप अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया है। यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिली है। विदेश मंत्री की स्कॉट बेसेंट के साथ बैठक को इसी ट्रेड डील को जमीन पर उतारने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। ट्रेजरी विभाग के साथ हुई इस चर्चा में व्यापार नियमों के तालमेल और बाजार तक पहुंच को आसान बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

रणनीतिक साझेदारी: रक्षा से लेकर क्रिटिकल मिनरल्स तक

दिन के दूसरे पड़ाव में एस. जयशंकर ने अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से मुलाकात की। इस बैठक में द्विपक्षीय सहयोग के रणनीतिक स्तंभों—परमाणु ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज), और रक्षा तकनीक—पर विस्तार से बात हुई। मार्को रुबियो ने क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और उनकी सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने में भारत की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। यह खनिज आधुनिक तकनीक, क्लीन एनर्जी और रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। दोनों नेताओं ने माना कि क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी अनिवार्य है।

क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल: वाशिंगटन में वैश्विक मंथन

अमेरिका बुधवार को पहली बार ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ की मेजबानी करने जा रहा है, जिसमें 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस बैठक का उद्देश्य चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करना और खनिजों की एक विविध व सुरक्षित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार, जयशंकर और रुबियो ने इस क्षेत्र में खनन और प्रोसेसिंग को लेकर भारत-अमेरिका सहयोग को औपचारिक रूप देने पर सहमति जताई है।

क्वाड और इंडो-पैसिफिक: साझा सुरक्षा का संकल्प

बैठक के समापन पर दोनों लोकतांत्रिक देशों ने ‘क्वाड’ (QUAD) के जरिए बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। जयशंकर और रुबियो ने स्पष्ट किया कि एक मुक्त, खुला और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र भारत और अमेरिका दोनों के साझा हितों के लिए आवश्यक है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दोनों देश साझा आर्थिक लक्ष्यों और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में मिलकर काम करेंगे। यह बैठक न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते कद को भी रेखांकित करती है।

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