Plastic Note: बारिश में जेब में रखा नोट भीग जाना, बार-बार इस्तेमाल से उसका फट जाना या पुराना और गंदा होने के बाद उसे चलाने में परेशानी होना अब जल्द ही पुरानी बात हो सकती है। भारत में कागजी करेंसी के विकल्प के तौर पर पॉलिमर यानी प्लास्टिक नोट लाने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाया है। सरकार ने 10 और 20 रुपये मूल्यवर्ग के करीब 200 करोड़ पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में इसकी जानकारी दी है। हालांकि, इन नोटों को देशभर में कब जारी किया जाएगा, इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।
प्लास्टिक करेंसी क्या है और पॉलिमर नोट कैसे बनते हैं?
पॉलिमर नोट सामान्य कागजी करेंसी से अलग एक खास तरह की पतली और लचीली प्लास्टिक सामग्री से तैयार किए जाते हैं। इसमें BOPP यानी बॉयएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। यह सामान्य कागज की तुलना में ज्यादा मजबूत और टिकाऊ मानी जाती है। भारत के लिए प्लास्टिक करेंसी का इस्तेमाल नया जरूर है, लेकिन दुनिया के कई देशों में यह व्यवस्था पहले से मौजूद है।
ज्यादा टिकाऊ होगी प्लास्टिक करेंसी
भारत में 10 और 20 रुपये के नोट सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली करेंसी में शामिल हैं। लगातार हाथ बदलने, नमी और पानी के संपर्क में आने के कारण कागजी नोट जल्दी खराब हो सकते हैं। इसके मुकाबले पॉलिमर नोट पानी के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी होते हैं और आसानी से फटते या गलते नहीं हैं। इनकी सतह पर धूल और गंदगी भी अपेक्षाकृत कम टिकती है और इन्हें साफ करना आसान होता है। ऐसे में बारिश के मौसम में जेब में रखा नोट भीगने पर उसके खराब होने की चिंता कम हो सकती है।
लंबे समय तक चलेंगे प्लास्टिक नोट
पॉलिमर करेंसी का एक बड़ा फायदा इसकी लंबी उम्र बताई जाती है। अगर कोई नोट लंबे समय तक इस्तेमाल में रहता है तो बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम हो सकती है। इससे पुराने और खराब नोटों को वापस लेने तथा उन्हें नष्ट करने पर होने वाला खर्च भी घट सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक चलने वाली करेंसी से कागज, पानी, स्याही और ऊर्जा जैसे संसाधनों की खपत में भी कमी आने की संभावना है। इस्तेमाल किए गए पॉलिमर नोटों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत रिसाइकिल भी किया जा सकता है।
नकली नोटों पर लगाम लगाने में मददगार हो सकती है पॉलिमर करेंसी
प्लास्टिक नोटों की सुरक्षा भी उनकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक मानी जाती है। पॉलिमर नोटों में पारदर्शी विंडो और कई आधुनिक सिक्योरिटी फीचर शामिल किए जा सकते हैं। इन फीचर्स की सामान्य प्रिंटर या स्कैनर के जरिए हूबहू नकल करना मुश्किल होता है। ऐसे में पॉलिमर करेंसी के इस्तेमाल से नकली नोटों की चुनौती से निपटने में मदद मिल सकती है। हालांकि, नकली नोटों पर इसका वास्तविक प्रभाव ट्रायल और व्यापक इस्तेमाल के बाद ही स्पष्ट होगा।
दीमक और नमी से भी सुरक्षित रहेंगे पॉलिमर नोट
कागजी नोटों को पानी और नमी के अलावा दीमक से भी नुकसान पहुंच सकता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जहां लोगों की नकदी दीमक या नमी के कारण खराब हो गई। पॉलिमर नोट प्लास्टिक आधारित सामग्री से बने होने के कारण दीमक के नुकसान से सुरक्षित रह सकते हैं। यही वजह है कि लंबे समय तक नकदी को सुरक्षित रखने के लिहाज से भी इन्हें उपयोगी माना जाता है।
क्या प्लास्टिक नोट आने के बाद कागजी नोट बंद हो जाएंगे?
पॉलिमर नोटों की शुरुआत का मतलब यह नहीं है कि भारत में 10 और 20 रुपये के कागजी नोट तुरंत बंद कर दिए जाएंगे। फिलहाल सरकार ने केवल पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दी है। शुरुआती परीक्षण छोटे मूल्यवर्ग के नोटों पर किया जाएगा। ट्रायल के दौरान इनकी टिकाऊ क्षमता, सुरक्षा, लागत और इस्तेमाल से जुड़े दूसरे पहलुओं का आकलन किया जाएगा। इसके बाद ही बड़े स्तर पर इन्हें जारी करने को लेकर फैसला होगा। इसलिए फिलहाल कागजी और पॉलिमर नोटों के साथ-साथ चलने की संभावना है।
ऑस्ट्रेलिया से शुरू हुई थी प्लास्टिक करेंसी की कहानी
दुनिया में पॉलिमर करेंसी का इस्तेमाल कई दशकों से हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने जनवरी 1988 में 10 डॉलर का पॉलिमर नोट जारी किया था। इसके बाद कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, सिंगापुर, ब्रुनेई, रोमानिया और वियतनाम समेत कई देशों ने भी इस तकनीक को अपनाया। दुनिया के कई देशों के अनुभव में पॉलिमर नोटों को कागजी करेंसी की तुलना में ज्यादा टिकाऊ और पानी के प्रति अधिक प्रतिरोधी बताया गया है।
भारत में कब आएंगे प्लास्टिक के 10 और 20 रुपये के नोट?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आम लोगों को प्लास्टिक के 10 और 20 रुपये के नोट कब देखने को मिलेंगे। इसका कोई निश्चित जवाब अभी सामने नहीं आया है। सरकार ने अभी केवल फील्ड ट्रायल की अनुमति दी है। ट्रायल के नतीजों के आधार पर आगे का फैसला होगा। अगर परीक्षण सफल रहा और लागत, सुरक्षा तथा उपयोगिता के मानक संतोषजनक पाए गए, तो आने वाले समय में भारत की करेंसी व्यवस्था में पॉलिमर नोटों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। ऐसे में प्लास्टिक करेंसी भारत के नोटों के भविष्य में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।










