Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रयागराज माघ मेले में पार्टी संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की मूर्ति स्थापित न होने को लेकर योगी सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर नियमों की मनमानी की जा रही है और अधिकारी सरकार की “चापलूसी” में लगे हुए हैं। अखिलेश यादव का कहना है कि जब नियम बदले जा सकते हैं, तो फिर समानता के आधार पर सभी के लिए नियम लागू होने चाहिए।
Akhilesh Yadav: “नियम बदले तो भगवानों की मूर्तियां लगाएंगे”
एबीपी न्यूज़ से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि अगर अधिकारी नियमों की व्याख्या अपने हिसाब से बदल रहे हैं, तो समाजवादी पार्टी भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में माघ मेले में सभी भगवानों की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। साथ ही उन्होंने आयोजन से जुड़े लोगों से यह भी अपील की कि केदारेश्वर मंदिर की स्थापना पर भी विचार किया जाए, ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक संतुलन बना रहे।
Akhilesh Yadav: अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
अखिलेश यादव ने तीखे शब्दों में कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस नियम के तहत कुछ चीजों की अनुमति दी जा रही है और कुछ को रोका जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि “चापलूसी” किस नियम में आती है और अगर यह चलन बन गया है तो फिर निष्पक्ष प्रशासन की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उनके अनुसार, ऐसे फैसले लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं।
पार्टी कार्यालय में बाटी-चोखा सहभोज
इस दौरान अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित बाटी-चोखा सहभोज कार्यक्रम पर भी बात की। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को इस आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि यह कार्यक्रम आपसी भाईचारे और सम्मान की मिसाल है। अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी की संस्कृति हमेशा मिलजुलकर बैठने, खाने और एक-दूसरे का सम्मान करने की रही है।
ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर तंज
अखिलेश यादव ने बीजेपी द्वारा आयोजित ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि अभी तो बीजेपी के विधायक बैठकर साथ में खाना खा रहे हैं, लेकिन अगर वही विधायक सरकार के खिलाफ खड़े हो जाएं तो सरकार का क्या होगा। उन्होंने इसे सत्ता के भीतर असंतोष का संकेत बताया।
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर भी योगी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री ने पहले दावा किया था कि चार करोड़ वोट कट गए हैं। अब जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे चुनाव आयोग और प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
चुनाव आयोग और अधिकारियों की विश्वसनीयता पर सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर आंकड़ों में अंतर पाया जाता है तो चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना होगा कि एसआईआर और इंटेंसिव प्रोविजन का असली मतलब क्या है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं तकनीक के नाम पर किसी तरह की हेराफेरी की तैयारी तो नहीं हो रही है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री के इशारों पर अगर बेईमानी होती है तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा होगा।
सियासी माहौल हुआ और गरम
मूर्ति विवाद से लेकर चुनावी प्रक्रिया तक, अखिलेश यादव के बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई गर्मी पैदा कर दी है। आने वाले समय में इन मुद्दों पर सरकार की प्रतिक्रिया और विपक्ष की रणनीति राजनीतिक माहौल को और तेज कर सकती है।










