India Condolences Iran: मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव और कूटनीतिक दबाव के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए घातक हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद भारत ने आधिकारिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। लंबे समय तक चुप्पी साधे रखने के बाद, भारत सरकार ने अब इस घटना की निंदा करते हुए अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं, जिसे वैश्विक राजनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरानी दूतावास पहुंचे विदेश सचिव: शोक पुस्तिका पर किए हस्ताक्षर
भारत सरकार ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक संवेदना व्यक्त की है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्वयं दूतावास का दौरा किया और वहां रखी शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान उन्होंने अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया और ईरानी जनता के प्रति भारत की सहानुभूति प्रकट की। अब तक मोदी सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी आधिकारिक टिप्पणी नहीं की थी, लेकिन इस कदम से भारत ने संकेत दिया है कि वह ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।
विपक्ष के सवाल और सोनिया गांधी की आलोचना
खामेनेई की मौत के बाद से ही भारत में राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ था। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने भारत सरकार के ‘मौन’ पर सवाल उठाए थे। विपक्ष का तर्क था कि बिना किसी उकसावे के एक देश के सर्वोच्च नेता की हत्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और भारत को इसकी निंदा करनी चाहिए। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने तो एक लेख के जरिए सरकार की विदेश नीति को कटघरे में खड़ा किया था। विपक्षी दबाव और ईरान के साथ रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता के बीच सरकार का यह ताजा रुख सामने आया है।
तेहरान में तबाही: खामेनेई के आवास पर इजरायल-अमेरिका का प्रहार
बता दें कि कुछ दिन पूर्व इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान की राजधानी तेहरान पर मिसाइलों की बौछार कर दी थी। इस हमले ने न केवल ईरान की सैन्य शक्ति को चुनौती दी, बल्कि सीधे सुप्रीम लीडर के आवास को निशाना बनाया। इस भीषण आक्रमण में अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों की जान चली गई। इस घटना ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है, जिससे अरब देशों में भारी अस्थिरता पैदा हो गई है।
ईरान का जवाबी हमला और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर संकट
अपने सर्वोच्च नेता की मौत से बौखलाए ईरान ने अब आक्रामक रुख अपना लिया है। ईरान ने न केवल अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, बल्कि सऊदी अरब, बहरीन, यूएई, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों पर भी अंधाधुंध मिसाइलें बरसाई हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह बंद कर दिया है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर गहरा संकट मंडराने लगा है, जिससे भारत सहित दुनिया भर के देश प्रभावित हो रहे हैं।
निष्कर्ष: भारत का कूटनीतिक संतुलन
भारत द्वारा खामेनेई की हत्या पर संवेदना व्यक्त करना एक ‘बैलेंसिंग एक्ट’ की तरह देखा जा रहा है। एक तरफ जहां भारत के अमेरिका और इजरायल के साथ प्रगाढ़ सुरक्षा संबंध हैं, वहीं दूसरी तरफ चाबहार पोर्ट और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से ईरान भी भारत के लिए अपरिहार्य है। विदेश सचिव का दूतावास जाना यह दर्शाता है कि भारत इस महायुद्ध के बीच भी अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और क्षेत्रीय हितों को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहा है।










