Strait of Hormuz : पश्चिम एशिया में जारी भारी सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस गंभीर स्थिति के बीच, भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता को तेज करते हुए वैश्विक मंच पर मध्यस्थ और समाधानकर्ता की भूमिका अपनाई है। इसी क्रम में, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण वार्ताएं कीं। इन चर्चाओं का प्राथमिक उद्देश्य न केवल क्षेत्र में शांति बहाल करना है, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए पूरी तरह खुला और सुरक्षित रखना है।
भारत-जापान वार्ता: होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर विशेष मंथन
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने जापानी समकक्ष तोशिमित्सु मोटेगी के साथ टेलीफोन पर एक लंबी और सार्थक बातचीत की। इस वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति और उसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव था। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक ‘लाइफलाइन’ है। जापानी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों देशों के बीच इस बात पर पूर्ण सहमति बनी कि मिडिल ईस्ट में नेविगेशन (नौवहन) की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है ताकि कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रह सके।
दुख की घड़ी में एकजुटता: जापानी विदेश मंत्री ने भारतीय नागरिकों के प्रति जताई संवेदना
कूटनीतिक चर्चाओं के साथ-साथ, मानवीय संवेदनाओं का आदान-प्रदान भी इस वार्ता का एक अहम हिस्सा रहा। विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बातचीत के दौरान क्षेत्रीय विकास और समुद्री सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से, जापानी विदेश मंत्री मोटेगी ने अमेरिका-ईरान संघर्ष की चपेट में आकर अपनी जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। जयशंकर ने संकट की इस घड़ी में जापान द्वारा दिखाई गई इस सहानुभूति और एकजुटता के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
मॉरीशस के साथ मजबूत साझेदारी: समुद्री सुरक्षा और विकास सहयोग पर चर्चा
जापान के साथ टेलीफोनिक वार्ता से ठीक पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीन रामगुलाम से मुलाकात की। इस बैठक में जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं प्रेषित कीं। दोनों नेताओं ने पिछले एक वर्ष के दौरान भारत और मॉरीशस के बीच हुई व्यापक प्रगति की समीक्षा की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) रहा। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए मॉरीशस भारत का एक अपरिहार्य साझेदार है और दोनों देश पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं।
वैश्विक सप्लाई चेन पर मंडराता खतरा: भारत की बढ़ती कूटनीतिक जिम्मेदारी
वर्तमान में जारी युद्ध जैसी स्थितियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। यदि होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाली शिपिंग बाधित होती है, तो पूरी दुनिया में ईंधन और आवश्यक संसाधनों की भारी कमी हो सकती है। ऐसी स्थिति में भारत, जापान और मॉरीशस जैसे लोकतांत्रिक देशों का एक मंच पर आना यह दर्शाता है कि दुनिया अब समाधान के लिए बहुपक्षीय कूटनीति की ओर देख रही है। भारत की यह सक्रियता न केवल उसके आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत को एक ‘जिम्मेदार वैश्विक शक्ति’ (Responsible Global Power) के रूप में भी मजबूती से स्थापित करती है।
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