India GDP Growth: भारतीय अर्थव्यवस्था की ‘सुपरफास्ट’ रफ्तार, नए बेस ईयर के साथ विकास दर 7.8% पहुंची

भारत सरकार ने जीडीपी गणना के लिए आधार वर्ष (Base Year) को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। इस नए बदलाव के साथ वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) में विकास दर शानदार 7.8% रही है। क्या यह नई गणना विधि भारत को $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का रास्ता साफ करेगी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 27, 2026

India GDP Growth:  भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (दिसंबर तिमाही) में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए सबको चौंका दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में देश की जीडीपी विकास दर 7.8% दर्ज की गई है, जो विश्लेषकों द्वारा लगाए गए 7.4% के अनुमान से कहीं अधिक है। त्योहारों के सीजन में घरेलू मांग में आई तेजी और विभिन्न क्षेत्रों में जीएसटी कटौती के सरकारी फैसलों ने इस विकास को नई गति प्रदान की है।

नए बेस ईयर 2022-23 के साथ जारी हुए जीडीपी आंकड़े

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने इस बार एक बड़ा बदलाव करते हुए जीडीपी गणना के लिए आधार वर्ष (Base Year) को अपडेट कर दिया है। अब तक जीडीपी के आंकड़े 2011-12 के आधार पर तैयार किए जाते थे, लेकिन अब सरकार ने 2022-23 को नया आधार वर्ष मानकर डेटा जारी किया है। इस बदलाव का उद्देश्य आधुनिक आर्थिक गतिविधियों को आंकड़ों में बेहतर तरीके से शामिल करना है। पिछले वर्ष की इसी तिमाही में वृद्धि दर 6.2% थी, जिसकी तुलना में वर्तमान आंकड़े काफी उत्साहजनक हैं।

अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर

नए फ्रेमवर्क के तहत जारी आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का मुख्य इंजन बनकर उभरा है। लगातार तीन वित्त वर्षों से इस क्षेत्र ने शानदार प्रदर्शन किया है। उत्पादन क्षेत्र में आई इस मजबूती के कारण सरकार ने अब वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7.6% कर दिया है, जो पुरानी सीरीज के आधार पर पहले 7.4% अनुमानित था।

राजकोषीय घाटा और सरकारी व्यय की स्थिति

आर्थिक आंकड़ों के साथ-साथ सरकार ने देश की वित्तीय स्थिति का ब्यौरा भी पेश किया है। जनवरी 2026 तक भारत का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) ₹9.81 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026 के पहले 9 महीनों के दौरान सरकार का कुल खर्च ₹36.9 लाख करोड़ रहा, जबकि इस अवधि में सरकार की कुल प्राप्तियां ₹27.1 लाख करोड़ दर्ज की गई हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार बुनियादी ढांचे और विकास योजनाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है।

आधार वर्ष बदलने के पीछे का मुख्य उद्देश्य

जीडीपी गणना के आधार वर्ष को बदलना देश की सांख्यिकीय प्रणाली को आधुनिक बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। पिछले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदला है। नए बेस ईयर के साथ अब डिजिटल इकोनॉमी, गिग वर्क और स्टार्टअप्स जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों को जीडीपी में अधिक वेटेज (महत्व) दिया गया है। वहीं, पारंपरिक कृषि और असंगठित विनिर्माण क्षेत्र के हिस्से में मामूली कमी देखी जा सकती है। इससे नीति निर्माताओं को आर्थिक स्थिति की अधिक सटीक और अपडेटेड तस्वीर देखने को मिलेगी।

निष्कर्ष: वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत होता भारत

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत की 7.8% की विकास दर यह साबित करती है कि घरेलू उपभोग और औद्योगिक उत्पादन की नींव काफी मजबूत है। नए बेस ईयर के तहत पेश किए गए ये आंकड़े न केवल निवेशकों का भरोसा बढ़ाएंगे, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेंगे कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहे। आगामी बजट और आर्थिक नीतियों में इन नए आंकड़ों का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

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