Census 2027: भारत में 16वीं जनगणना की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। देश की पहली संपूर्ण डिजिटल जनगणना 2027 का प्रथम चरण बुधवार, 1 अप्रैल 2026 से दिल्ली समेत देश के चुनिंदा राज्यों में जमीन पर उतर गया है। असल में यह महा-अभियान साल 2021 में ही आयोजित होना था, लेकिन वैश्विक कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के विकराल रूप ले लेने के कारण इसमें अप्रत्याशित देरी हुई। इससे पूर्व भारत में आखिरी बार आधिकारिक तौर पर सिरों की गिनती (Census) साल 2010-11 में की गई थी। यह पूरी कवायद मानव इतिहास की सबसे बड़ी सांख्यिकीय और प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जा रही है।
पहले चरण में पूछे जाएंगे 33 महत्वपूर्ण प्रश्न
बताते चले कि, इस बार की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक है। पहली बार देश के आम नागरिकों को यह खास विकल्प दिया गया है कि वे ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) के माध्यम से अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकें। केंद्र सरकार ने इस शुरुआती दौर के लिए कुल 33 सवालों की एक विस्तृत सूची जारी की है। इस शुरुआती प्रक्रिया को ‘हाउसिंग लिस्टिंग और हाउसिंग ऑपरेशंस’ का नाम दिया गया है। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्थानीय कैलेंडर के अनुसार, इस काम को 1 अप्रैल से लेकर 30 सितंबर 2026 के बीच हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।
डेटा संकलन कुल दो अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा
देश की आबादी का यह विशाल डेटा संकलन कुल दो अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस महती योजना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट को पहले ही हरी झंडी दे दी थी। प्रथम चरण में घरों की सूची बनाने (Houselisting) और आवासों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा। वहीं, इस महा-अभियान का दूसरा और मुख्य चरण ‘जनसंख्या गणना’ (Population Enumeration) फरवरी 2027 में संचालित होगा। हालांकि, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के बर्फ प्रभावित दुर्गम इलाकों में यह काम सितंबर 2026 में ही निपटा लिया जाएगा।
मोबाइल ऐप और केंद्रीय पोर्टल से होगी हाई-टेक निगरानी
इस राष्ट्रीय महत्व के बेहद जटिल कार्य को जमीन पर उतारने के लिए लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारियों की एक बड़ी फौज तैनात की गई है। इस बार कागजी प्रपत्रों की जगह डेटा कलेक्शन के लिए आधुनिक मोबाइल एप्लिकेशन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष केंद्रीय पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया की पल-पल की निगरानी के लिए ‘सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ (CMMS) और प्रभारियों के लिए ‘HLB क्रिएटर वेब मैप एप्लिकेशन’ तैयार किया गया है।
1931 के बाद पहली बार पूछे जाएंगे जाति से जुड़े सवाल
इस 16वीं जनगणना की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक विशेषता यह है कि इसके दूसरे चरण में लोगों की जाति (Caste) का डेटा भी एकत्रित किया जाएगा। भारत में आखिरी बार व्यापक स्तर पर जातिगत आंकड़े 1931 की ब्रिटिशकालीन जनगणना में जुटाए गए थे। आजादी के बाद से अब तक हुई सभी जनगणनाओं में जाति के कॉलम को बाहर रखा गया था। लेकिन पिछले साल 30 अप्रैल को केंद्रीय कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति ने सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए इस बार जातिगत गणना को भी हरी झंडी दे दी थी।
16 भाषाओं में खुद भर सकेंगे अपनी डिटेल
33 सवालों की इस सूची में परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम, जेंडर, आवास का मालिकाना हक, एलपीजी कनेक्शन, इंटरनेट, वाहन और अनाज के उपभोग जैसे भौतिक संसाधनों से जुड़े आंकड़े लिए जाएंगे। खास बात यह है कि देशवासी अपने क्षेत्र में वास्तविक गणना शुरू होने से 15 दिन पहले ही 16 अलग-अलग मान्यता प्राप्त भाषाओं में ऑनलाइन माध्यम से अपनी ‘स्व-गणना’ कर सकते हैं। इसके बाद उन्हें 16 अंकों की एक अनूठी ‘आईडी’ (ID) मिलेगी, जिसे सत्यापन के लिए घर आने वाले प्रगणक (Enumerator) को दिखाना होगा।










