INDIA Bloc Meeting: INDIA गठबंधन में दरार, केजरीवाल और स्टालिन का अलग रास्ता

INDIA ब्लॉक में दरार गहराती दिख रही है क्योंकि अरविंद केजरीवाल और एमके स्टालिन ने दिल्ली बैठक से दूरी बनाकर अलग राजनीतिक राह चुन ली है। कांग्रेस से बढ़ती नाराजगी के बीच विपक्षी एकता पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह गठबंधन टूट की ओर बढ़ रहा है, चर्चा तेज है।

INDIA गठबंधन में दरार

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 8, 2026

INDIA Bloc Meeting: 2024 लोकसभा चुनाव से पहले बने INDIA ब्लॉक में अब दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं। दिल्ली में हो रही विपक्षी दलों की बैठक से आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने दूरी बना ली है। दोनों दलों की नाराजगी मुख्य रूप से कांग्रेस की रणनीति और नेतृत्व शैली को लेकर बताई जा रही है। हालांकि विपक्षी गठबंधन का मकसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाना था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इसकी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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DMK ने INDIA ब्लॉक से बनाई दूरी

तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से कांग्रेस के सहयोगी रहे DMK ने अब INDIA ब्लॉक से दूरी बना ली है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने साफ संकेत दिया है कि उनकी पार्टी अब इस गठबंधन की गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा नहीं लेगी। DMK की नाराजगी की बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि कांग्रेस ने तमिलनाडु की राजनीति में TVK के साथ संभावित समीकरणों को लेकर अलग रुख अपनाया, जिसे DMK ने विश्वासघात के रूप में देखा। इसी कारण पार्टी ने दिल्ली बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया।पार्टी नेताओं का कहना है कि वे अब किसी ऐसे मंच का हिस्सा नहीं रहना चाहते जहां कांग्रेस का दबदबा हो।

स्टालिन की नई रणनीति 

एम.के. स्टालिन अब राष्ट्रीय राजनीति से अधिक तमिलनाडु की क्षेत्रीय राजनीति पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। उनका फोकस राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने और द्रविड़ राजनीति को आगे बढ़ाने पर रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार स्टालिन अब छोटे क्षेत्रीय दलों और वामपंथी संगठनों के साथ मिलकर एक नया क्षेत्रीय गठबंधन तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर “थर्ड फ्रंट” या “फेडरल फ्रंट” बनाना अभी आसान नहीं माना जा रहा।

AAP का अलग रास्ता 

दिल्ली और पंजाब की राजनीति में सक्रिय आम आदमी पार्टी भी अब INDIA ब्लॉक से दूरी बनाती दिख रही है। अरविंद केजरीवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी अब स्वतंत्र रूप से राजनीतिक रणनीति आगे बढ़ाएगी। AAP का आरोप है कि कांग्रेस क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने की कोशिश करती है। इसी कारण पार्टी ने दिल्ली बैठक से दूरी बनाए रखी है। केजरीवाल अब खुद को भाजपा के मुख्य विकल्प के रूप में पेश करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। खासकर गुजरात, गोवा और पंजाब जैसे राज्यों में पार्टी अपनी अलग पहचान मजबूत करना चाहती है।

विपक्षी गठबंधन में बढ़ती खींचतान

INDIA ब्लॉक के भीतर बढ़ती असहमति यह दिखा रही है कि विपक्षी एकता उतनी मजबूत नहीं है जितनी चुनाव से पहले दिखाई गई थी। कई क्षेत्रीय दल अब अपने-अपने हितों के अनुसार अलग रणनीति अपना रहे हैं। DMK और AAP जैसे बड़े दलों का अलग होना गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे विपक्षी मोर्चे की भविष्य की दिशा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

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क्या बनेगा नया राजनीतिक समीकरण?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत की राजनीति अब धीरे-धीरे बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। जहां एक तरफ BJP एक मजबूत राष्ट्रीय शक्ति बनी हुई है, वहीं विपक्ष में कई क्षेत्रीय शक्तियां अपने-अपने आधार पर आगे बढ़ रही हैं।

स्टालिन और केजरीवाल जैसे नेता अब किसी बड़े गठबंधन के बजाय स्वतंत्र राजनीतिक रास्ता चुनते नजर आ रहे हैं। हालांकि, संसद में राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्षी सहयोग कुछ हद तक जारी रह सकता है, लेकिन औपचारिक गठबंधन की संभावना कमजोर होती जा रही है।