INDIA Bloc Meeting: दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सोमवार को विपक्षी INDIA ब्लॉक की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कांग्रेस सहित कुल 23 राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक का उद्देश्य केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना और विपक्षी एकता को मजबूत करना था।
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बैठक की शुरुआत और कांग्रेस की भूमिका
बैठक की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन से की। उन्होंने सभी दलों के नेताओं से आग्रह किया कि वे अपने विचार संक्षेप में रखें, ताकि बैठक की कार्यवाही सुचारु रूप से आगे बढ़ सके। खरगे ने यह भी कहा कि सभी दल मिलकर आगे की रणनीति और जरूरी कदमों पर सामूहिक चर्चा करेंगे। बैठक के बाद दोपहर 2:30 बजे सभी नेता मीडिया को संयुक्त रूप से संबोधित करेंगे।
अखिलेश यादव को मिली बड़ी जिम्मेदारी
बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव को आगे की कार्यवाही का संचालन सौंपा। कांग्रेस मीडिया प्रकोष्ठ द्वारा जारी बयान के अनुसार, मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा—“अब मैं अखिलेश जी से अनुरोध करूंगा कि वे हमारी कार्यवाही की शुरुआत करें।”इस फैसले को विपक्षी एकता के भीतर सहयोग और भरोसे के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव का बयान बैठक से पहले
बैठक में शामिल होने से पहले अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बैठक का एजेंडा क्या होगा, यह वहां पहुंचने के बाद ही तय होगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष का लक्ष्य “बंधु राज” स्थापित करना होना चाहिए और यही उनकी पार्टी का प्रयास रहेगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में हालात लगातार बदल रहे हैं और जनता, विशेषकर महिलाएं, सरकार से असंतुष्ट हैं। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करना बेहद जरूरी है, और विपक्ष का प्रयास इन्हीं मूल्यों को मजबूत करने का है।
बैठक के दौरान नेताओं की मौजूदगी
बैठक में अखिलेश यादव, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एक साथ बैठे नजर आए। इस दौरान नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत भी देखने को मिली।
विपक्षी एकता पर नजरें
INDIA ब्लॉक की इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां एक ओर कांग्रेस नेतृत्व समन्वय बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी लगातार बढ़ती दिख रही है।
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