Bangladesh Suspends Visa Services: बांग्लादेश ने भारतीयों के लिए बंद किए टूरिस्ट वीजा के दरवाजे, अब केवल इन लोगों को मिलेगी एंट्री।

भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारतीय नागरिकों के लिए वीजा नियमों को सख्त कर दिया गया है। कोलकाता, मुंबई और चेन्नई स्थित मिशनों में टूरिस्ट वीजा सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है। अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा और छात्र नेता हादी की हत्या के बाद उपजे भारत-विरोधी प्रदर्शनों ने दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को संकट में डाल दिया है।

Bangladesh Suspends Visa Services

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 8, 2026

Bangladesh Suspends Visa Services: भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक दरार और गहरी होती जा रही है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा और आंतरिक अस्थिरता के बीच, ढाका ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह फैसला विशेष रूप से कोलकाता, मुंबई और चेन्नई स्थित मिशनों पर लागू किया गया है, जिससे दोनों देशों के बीच सामान्य आवाजाही लगभग ठप होने की कगार पर पहुंच गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर तीखी बयानबाजी जारी है।

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वीजा सेवाओं पर कड़ा प्रतिबंध

बताते चले कि, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बुधवार रात एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए भारतीय नागरिकों के लिए वीजा जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक सीमित कर दिया है। नए आदेशों के अनुसार, व्यवसाय और रोजगार वीजा को छोड़कर अन्य सभी श्रेणियों, विशेषकर टूरिस्ट वीजा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। कोलकाता स्थित डिप्टी हाई कमीशन में कांसुलर सेवाएं पूरी तरह रोक दी गई हैं, जबकि मुंबई और चेन्नई में भी इसी तरह की पाबंदियां लागू की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा चिंताओं और मौजूदा कूटनीतिक माहौल की समीक्षा के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।

अगरतला से दिल्ली तक मिशनों में कामकाज ठप

वीजा सेवाओं में कटौती का यह सिलसिला पहले ही शुरू हो चुका था। 22 दिसंबर को नई दिल्ली स्थित उच्चायोग और अगरतला, सिलीगुड़ी तथा गुवाहाटी के केंद्रों में सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी गई थी। अब इस दायरे को बढ़ाकर पूरे भारत में फैले बांग्लादेशी मिशनों को कवर कर लिया गया है। भारत-बांग्लादेश सीमा तनाव और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने स्थिति को इतना संवेदनशील बना दिया है कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अब केवल गिनी-चुनी श्रेणियों में ही यात्रा की अनुमति दी जा रही है।

विवाद की मुख्य जड़

दोनों देशों के बीच रिश्तों में आई इस कड़वाहट की शुरुआत 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद हुई थी। तब से ही बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों (विशेषकर हिंदुओं) के खिलाफ हिंसा की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। भारत ने इन घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की है और हिंदुओं की सुरक्षा पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। हाल के दिनों में कई हिंदू युवकों की संदिग्ध मौत ने इस आग में घी डालने का काम किया है, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।

शरीफ उस्मान हादी की हत्या

दिसंबर 2025 में यह तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब छात्र आंदोलन के नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या कर दी गई। हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में यह अफवाह फैल गई कि हमलावर सीमा पार कर भारत भाग गया है। इस दावे ने बांग्लादेश में भारत-विरोधी जनाक्रोश को हवा दी, जिसके परिणामस्वरूप ढाका में भारतीय उच्चायोग की ओर बड़े पैमाने पर ‘लॉन्ग मार्च’ निकाला गया। ढाका का आरोप है कि भारत इन घटनाओं को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है, जबकि भारत का रुख अपनी सीमाओं और पड़ोस में रहने वाले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट है।

क्या पटरी पर लौटेंगे संबंध?

बांग्लादेश सरकार वर्तमान में भारत के साथ अपने संबंधों और सुरक्षा स्थिति का व्यापक आकलन कर रही है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह प्रतिबंध किसी एक घटना का परिणाम नहीं हैं, बल्कि पूरे हालात की समीक्षा के बाद लिए गए हैं। दूसरी ओर, भारत ने भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पहले ही बांग्लादेशी नागरिकों के लिए कुछ कड़े नियम लागू किए थे। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि जब तक सांप्रदायिक शांति और राजनीतिक स्थिरता बहाल नहीं होती, तब तक दोनों देशों के बीच सामान्य कूटनीतिक संबंध बहाल होना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

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