India AI Summit 2026: कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला, फंडिंग और कुप्रबंधन पर उठाए सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026' में हुई अव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अमेरिका के मुकाबले भारत के कम AI बजट और समिट में उद्यमियों के साथ हुए दुर्व्यवहार को उजागर करते हुए इसे सिर्फ एक 'रील इवेंट' करार दिया। (58 शब्द)

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

फ़रवरी 18, 2026

India AI Summit 2026: कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने हाल ही में आयोजित ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ के प्रबंधन और केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकताएं तकनीकी विकास के बजाय केवल प्रचार और ‘रील’ बनाने तक सीमित हैं।

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अमेरिका बनाम भारत का वित्तीय अंतर

बताते चले कि, सुप्रिया श्रीनेत ने भारतीय AI क्षेत्र के लिए आवंटित बजट और वास्तविक खर्च के बीच की गहरी खाई को उजागर किया। उन्होंने तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए कहा कि जहां पिछले वर्ष संयुक्त राज्य अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर 198 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम निवेश किया, वहीं भारत का खर्च 1.9 बिलियन डॉलर के लक्ष्य तक भी नहीं पहुंच पाया। कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, एनडीए सरकार बड़े वादे तो करती है, लेकिन जब बात धरातल पर फंडिंग देने की आती है, तो वह पूरी तरह विफल साबित होती है।

उद्यमियों की परेशानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल का साया

आपको बता दे कि, सम्मेलन के आयोजन पर सवाल उठाते हुए श्रीनेत ने बताया कि इस टेक समिट में तकनीकी विशेषज्ञों और उद्यमियों को काफी अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान मुख्य हॉल से उन स्टार्टअप संस्थापकों को बाहर कर दिया गया जिन्होंने स्टॉल के लिए भुगतान किया था। इतना ही नहीं, समिट में स्थिर इंटरनेट की कमी, उपकरणों की चोरी और डिजिटल पेमेंट के बजाय केवल कैश स्वीकार किए जाने जैसी गंभीर शिकायतें भी सामने आईं। उन्होंने इसे विडंबना बताया कि एक AI सम्मेलन में लैपटॉप और कैमरे ले जाने पर भी पाबंदी थी।

अश्विनी वैष्णव पर तंज

कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को ‘रील मंत्री’ संबोधित करते हुए उन पर केवल प्रचार (PR) पर ध्यान देने का आरोप लगाया। श्रीनेत ने तंज कसते हुए कहा कि ‘डिजी-चेकइन’ के बावजूद लोगों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ा, जो मंत्रालय के प्रशासनिक कुप्रबंधन को दर्शाता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार अपनी विफलताओं के लिए अक्सर विपक्ष या पूर्ववर्ती सरकारों को दोषी ठहराती है, जबकि वास्तविकता यह है कि पूरा आयोजन केवल प्रधानमंत्री की ब्रांडिंग के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गया।

200 बिलियन डॉलर के निवेश लक्ष्य की हकीकत

अश्विनी वैष्णव द्वारा आगामी दो वर्षों में 200 बिलियन डॉलर के संभावित निवेश के दावों पर सुप्रिया ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार के कैबिनेट मंत्रियों को बड़े-बड़े आंकड़े और ‘लाखों करोड़’ की बातें करने की आदत हो गई है, लेकिन जमीन पर परिणाम शून्य हैं। उन्होंने रेलवे के उदाहरण के साथ तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह रेलवे की स्थिति बिगड़ी है, वही पैटर्न अब AI सेक्टर में भी दिखाई दे रहा है।

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