India Africa Forum Summit 2026: वैश्विक स्तर पर पैर पसार रहे घातक इबोला वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार और अफ्रीकी संघ (African Union) ने एक बड़ा और एहतियाती कदम उठाया है। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से नई दिल्ली में आयोजित होने वाले आगामी ‘भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन’ को फिलहाल स्थगित (Cancel) करने का फैसला लिया है। यह बहुप्रतीक्षित शिखर सम्मेलन 28 मई, 2026 को देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होना था। केंद्र सरकार ने गुरुवार (21 मई, 2026) को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस निर्णय की सार्वजनिक घोषणा की है।
अफ्रीका के कई हिस्सों में फैला संक्रमण
केंद्र सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, वर्तमान में अफ्रीकी महाद्वीप के कई देश और हिस्से खतरनाक इबोला वायरस की नई लहर से जूझ रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के साउथ किवु प्रांत में इस जानलेवा वायरस के कई नए और चिंताजनक मामले दर्ज किए गए हैं।
हालात की गंभीरता को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने इस प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (Global Health Emergency) घोषित कर दिया है। इसी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को प्राथमिकता देते हुए भारत और अफ्रीकी देशों ने सम्मेलन को किसी सुरक्षित तारीख तक टालना ही बेहतर समझा।
आपसी सहमति से लिया गया फैसला
यह महत्वपूर्ण निर्णय भारत सरकार और अफ्रीकी संघ की वर्तमान अध्यक्षता व अफ्रीकी संघ आयोग के बीच हुई उच्च स्तरीय चर्चा के बाद लिया गया है। आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि भले ही इस महा-सम्मेलन को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक और स्वास्थ्य सहयोग निरंतर बना रहेगा। भारत और अफ्रीका ने इस संकट की घड़ी में सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को मजबूत करने, अफ्रीका सीडीसी (Africa CDC) और वहां के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों को हर संभव सहायता और तकनीकी सहयोग प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।
भारत में अभी तक कोई मामला नहीं
राहत की बात यह है कि वर्तमान में भारत के भीतर इबोला वायरस का एक भी मामला रिपोर्ट नहीं हुआ है। इसके बावजूद, भारत सरकार किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। स्वास्थ्य सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए केंद्र सरकार ने पूरे देश के एंट्री पॉइंट्स पर निगरानी और मेडिकल तैयारियों को अत्यधिक बढ़ा दिया है।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर यात्रियों की प्री-अराइवल और पोस्ट-अराइवल थर्मल स्क्रीनिंग सुनिश्चित करें। इसके साथ ही अस्पतालों में क्वारंटाइन प्रोटोकॉल, केस मैनेजमेंट, आइसोलेशन वार्ड, रेफरल मैकेनिज्म और उन्नत लैब टेस्टिंग के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
कितना खतरनाक है इबोला का यह नया वैरिएंट?
विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला वायरस के कई अलग-अलग स्ट्रेन होते हैं। अफ्रीका में फैला वर्तमान प्रकोप मुख्यतः ‘बुंडीबुग्यो वैरिएंट’ (Bundibugyo Variant) से जुड़ा हुआ है। राहत की बात यह है कि यह वैरिएंट अतीत के ‘जायर वैरिएंट’ जितना अत्यधिक घातक और जानलेवा नहीं है, लेकिन इसकी संक्रामक क्षमता को देखते हुए अत्यधिक सतर्कता बरतना अनिवार्य है।
साल 2014-2016 के दौरान पश्चिम अफ्रीका में मची इबोला की तबाही की यादें अभी भी ताजा हैं, यही वजह है कि भारत सरकार वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोपरि मान रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति सामान्य होते ही दोनों पक्ष विचार-विमर्श कर भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन की नई तारीखों की घोषणा जल्द ही करेंगे।










