Electronics Production India : इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भारत की बड़ी छलांग, 118 यूनिट्स से खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। देश में 118 नई इलेक्ट्रॉनिक्स यूनिट्स स्थापित करने की योजना है, जिसके लिए करीब 7500 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। आखिर इन यूनिट्स से उद्योग, रोजगार और घरेलू उत्पादन को कितना फायदा मिलेगा? जानिए पूरी खबर।

Electronics Production

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

नवम्बर 6, 2026

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Electronics Production India : भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 118 इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण इकाइयों को मंजूरी देने की जानकारी दी है। इन परियोजनाओं से देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को नई गति मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य भारत को केवल मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की असेंबलिंग तक सीमित रखने के बजाय कंपोनेंट निर्माण में भी आत्मनिर्भर बनाना है।

118 यूनिट्स में 50 प्रतिशत SMEs और MSMEs की भागीदारी

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ECMS के तहत मंजूर की गई इकाइयों में लगभग 50 प्रतिशत छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) से संबंधित हैं। इससे छोटे कारोबारियों को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे, तीसरे और चौथे स्तंभ के तहत आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। इससे घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 25 लाख लोगों को रोजगार

मंत्री के मुताबिक, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। वर्तमान में इस क्षेत्र में लगभग 25 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। सरकार का मानना है कि कंपोनेंट्स, कच्चे माल और मशीनों का घरेलू उत्पादन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे युवाओं को तकनीकी कौशल हासिल करने और विनिर्माण क्षेत्र में करियर बनाने का मौका मिलेगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सरकार पूरी सप्लाई चेन को देश में विकसित करने पर जोर दे रही है।

बैटरी सेल से लेकर PCB तक भारत में हो रहा निर्माण

अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल फोन निर्माण के शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि पहले भारत की उत्पादन क्षमता पर सवाल उठाए जाते थे। कई लोगों को लगता था कि देश केवल विदेशों से आने वाले पुर्जों को जोड़ने यानी असेंबलिंग तक सीमित रहेगा। हालांकि, अब भारत ने इस सोच को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।उन्होंने बताया कि देश में अब बैटरी सेल, कॉपर फॉयल और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) के लिए कॉपर-क्लैड लैमिनेट्स का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा एनोड और कैथोड मटीरियल, फ्लेक्सिबल PCB तथा 20-लेयर PCB जैसी तकनीकी सामग्रियों का निर्माण भी घरेलू स्तर पर किया जा रहा है।

ऑप्टिकल ट्रांसीवर, रिले और कैपेसिटर का भी उत्पादन

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब ऑप्टिकल ट्रांसीवर, रिले और कैपेसिटर जैसे महत्वपूर्ण उत्पाद भी देश में बनाए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन की पूरी वैल्यू चेन भारत में विकसित हो, जिससे विदेशी कंपनियों पर निर्भरता घटे और घरेलू उद्योग मजबूत बने।मंत्री ने भरोसा जताया कि इन योजनाओं का फायदा आने वाले कई दशकों तक देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मिलेगा। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ेंगे।

ECMS के तहत 7500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को मंजूरी

सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत 7,500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाले 12 नए आवेदनों को भी मंजूरी दी है। सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को बताया कि इनमें सामग्री और पूंजीगत वस्तुओं से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इनसे इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन के अलग-अलग हिस्सों को मजबूती मिलेगी।सरकार अब केवल तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि कच्चे माल और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के घरेलू निर्माण को भी प्राथमिकता दे रही है।

सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम में शुरू हुआ नया डिजिटल प्लेटफॉर्म

सरकार ने शुक्रवार को महत्वाकांक्षी सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत सेमीकॉन 2.0 वेब एप्लिकेशन प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया। इस पहल से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आवेदन और कार्यक्रमों से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर ECMS और सेमीकॉन कार्यक्रम के जरिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन की वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी मजबूत जगह बनाने की तैयारी कर रहा है।

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