स्व-सहायता समूह के माध्यम से बढ़ी आय, ग्रामीण महिलाओं को मिला सशक्तिकरण और सम्मान

बिहान योजना से बदली सिवनी की रूखमणी पाण्डेय की जिंदगी, बनीं ‘लखपति दीदी’ और महिला आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल स्व-सहायता समूह के माध्यम से बढ़ी आय, ग्रामीण महिलाओं को मिला सशक्तिकरण और सम्मान रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ अंतर्गत लखपति दीदी पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड बलौदा अंतर्गत ग्राम सिवनी निवासी श्रीमती रूखमणी पाण्डेय ने आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। कभी पूर्णतः घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली रूखमणी पाण्डेय आज प्रतिमाह 15 से 20 हजार

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Published On :

जनवरी 2, 2026

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बिहान योजना से बदली सिवनी की रूखमणी पाण्डेय की जिंदगी, बनीं ‘लखपति दीदी’ और महिला आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल

स्व-सहायता समूह के माध्यम से बढ़ी आय, ग्रामीण महिलाओं को मिला सशक्तिकरण और सम्मान

रायपुर

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ अंतर्गत लखपति दीदी पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड बलौदा अंतर्गत ग्राम सिवनी निवासी श्रीमती रूखमणी पाण्डेय ने आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। कभी पूर्णतः घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली रूखमणी पाण्डेय आज प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये की नियमित आय अर्जित कर ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

कोरोना काल एवं लॉकडाउन के दौरान पशुपालन व्यवसाय में हुए आर्थिक नुकसान के बाद परिवार की आय का प्रमुख स्रोत प्रभावित हुआ, जिससे आर्थिक चुनौतियां बढ़ीं। इस कठिन समय में श्रीमती रूखमणी पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

आरबीके दीदी के सहयोग से ग्राम सिवनी में महिलाओं को संगठित कर उन्होंने ‘जय अम्बे महिला स्व सहायता समूह’ का गठन किया। 25 फरवरी 2020 को गठित यह समूह उन्नति महिला ग्राम संगठन सिवनी तथा बिहान महिला क्लस्टर संगठन कुरदा से संबद्ध है। समूह के माध्यम से बैंक लिंकेज के तहत एक लाख रुपये का ऋण तथा अतिरिक्त समूह ऋण प्राप्त कर उन्होंने पारंपरिक पशुपालन व्यवसाय को पुनः प्रारंभ किया। इसके साथ ही आचार, पापड़, मसाला एवं अगरबत्ती निर्माण जैसी विविध आजीविका गतिविधियों को अपनाया, जिससे उनकी आय में सतत वृद्धि हुई।

आज श्रीमती रूखमणी पाण्डेय न केवल अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं को स्वयं पूरा कर रही हैं, बल्कि स्व सहायता समूह की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार एवं आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से गांव की अनेक महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही हैं।

श्रीमती रूखमणी पाण्डेय ने कहा कि ‘लखपति दीदी पहल’ ने उन्हें आत्मविश्वास, पहचान और सम्मान प्रदान किया है। उन्होंने इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी सफलता यह प्रमाणित करती है कि प्रभावी मार्गदर्शन, समूह की सामूहिक शक्ति और सरकारी योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर समाज में सशक्त भूमिका निभा सकती हैं।

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