PM Modi Foreign Policy : विदेश नीति पर इमरान मसूद का पीएम मोदी पर बड़ा हमला, तेल खरीद को लेकर दिया विवादित बयान

PM Modi Foreign Policy : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। अपने आक्रामक और विवादित बयानों के लिए जाने जाने वाले मसूद ने इस बार सीधे केंद्र सरकार की विदेश नीति और आर्थिक फैसलों को अपने निशाने पर लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि देश की मौजूदा नीतियां आम जनता के हितों के खिलाफ जा रही हैं। मसूद के इस बयान के बाद राज्य और देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा

PM Modi Foreign Policy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 3, 2026

PM Modi Foreign Policy : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। अपने आक्रामक और विवादित बयानों के लिए जाने जाने वाले मसूद ने इस बार सीधे केंद्र सरकार की विदेश नीति और आर्थिक फैसलों को अपने निशाने पर लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि देश की मौजूदा नीतियां आम जनता के हितों के खिलाफ जा रही हैं। मसूद के इस बयान के बाद राज्य और देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जिस पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।

आर्थिक और कूटनीतिक संप्रभुता का मुद्दा

सांसद इमरान मसूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक कूटनीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी अपनी व्यक्तिगत ‘दोस्ती’ और वर्तमान विदेश नीति के नाम पर देश के आर्थिक तथा कूटनीतिक हितों से समझौता कर रहे हैं। मसूद ने दावा किया कि सरकार के फैसलों के कारण भारत कूटनीतिक रूप से विदेशी ताकतों, विशेषकर अमेरिका के प्रभाव में आता जा रहा है। उनका कहना था कि देश को आर्थिक रूप से ऐसी स्थिति में धकेला जा रहा है जहाँ बड़े फैसले स्वायत्तता से नहीं, बल्कि वैश्विक दबाव में लिए जा रहे हैं, जो देश की संप्रभुता के लिए ठीक नहीं है।

ईंधन की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति संकट

भारत की ऊर्जा और विदेश नीति पर सीधे सवाल उठाते हुए मसूद ने कहा कि देश आज एक गंभीर आर्थिक चक्रव्यूह में फंसा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के कूटनीतिक दबाव के कारण भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगे पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने को मजबूर है। मसूद के अनुसार, इसी वजह से घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं, जिसका सीधा बोझ देश के गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सरकार ने अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया, तो आने वाले समय में देश को भारी ईंधन और ऊर्जा आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ सकता है।

रूस से तेल आयात पर विवादित बयान

रूस से भारत द्वारा की जा रही तेल की खरीद और उस पर अमेरिका की कथित छूट को लेकर इमरान मसूद ने बेहद विवादित टिप्पणी की। सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, ‘तेल तब लेंगे, जब अब्बाजान परमिशन देंगे।’ मसूद का यह बयान सीधे तौर पर सरकार की उस कूटनीतिक स्वतंत्रता पर कटाक्ष था, जिसके तहत भारत वैश्विक मंचों पर अपनी मर्जी से फैसले लेने का दावा करता है। इस विवादित शब्दावली के इस्तेमाल के बाद सत्तापक्ष ने मसूद को घेरना शुरू कर दिया है और इसे देश के सम्मान के खिलाफ बताया है।

सरकार का दोपहिया रुख

दूसरी ओर, केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय ने विपक्ष के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार ने पहले ही कई मंचों पर पूरी तरह साफ कर दिया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल की खरीद को लेकर किसी भी बाहरी या विदेशी दबाव में काम नहीं करता है। सरकार का रुख स्पष्ट है कि भारत पूरी तरह से अपने नागरिकों के आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखता है और कूटनीतिक रूप से स्वतंत्र है। वैश्विक बाजार में जहाँ भी सबसे सस्ते दामों पर तेल उपलब्ध होता है, भारत अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर वहीं से तेल की खरीद सुनिश्चित करता है।

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