Imran Khan Legal Update: इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जेल में मुलाकात पर सस्पेंस बरकरार

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की सुरक्षा और जेल में उनकी 'लिविंग कंडीशन्स' को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। जहां एक तरफ तत्काल मुलाकात की अर्जी खारिज हुई, वहीं एक विशेष वकील को 'कोर्ट का मित्र' बनाकर जेल भेजने का फैसला कई राज खोल सकता है। क्या छिपा रही है सरकार?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 10, 2026

Imran Khan Legal Update: पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई (PTI) प्रमुख इमरान खान के लिए फिलहाल राहत के रास्ते बंद कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान से तत्काल मुलाकात की अनुमति मांगने वाली याचिका को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि न्यायपालिका किसी भी पक्ष को पूर्व सूचना दिए बिना एकतरफा आदेश पारित नहीं कर सकती। मुख्य न्यायाधीश याह्या अफरीदी ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं का अक्षरशः पालन करना अनिवार्य है। अदालत ने अब इस मामले में संघीय सरकार को औपचारिक नोटिस जारी किया है, जिससे इमरान की कानूनी टीम को मंगलवार तक का इंतजार करना होगा।

मुख्य न्यायाधीश का स्पष्ट संदेश: सरकार का पक्ष सुनना है जरूरी

चीफ जस्टिस याह्या अफरीदी ने पीटीआई के वरिष्ठ वकील लतीफ खोसा की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि सरकारी पक्ष की अनुपस्थिति में कोई भी निर्देश जारी करना न्यायोचित नहीं होगा। खोसा ने तर्क दिया था कि एक पूर्व प्रधानमंत्री को उनके कानूनी सलाहकारों से मिलने देना मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। हालांकि, अदालत ने इस पर सवाल उठाया कि क्या यह याचिका वर्तमान परिस्थितियों में सुनवाई के योग्य भी है? कोर्ट ने साफ किया कि जब तक सरकार अपना पक्ष नहीं रखती, तब तक मुलाकात के संबंध में कोई विशेष आदेश नहीं दिया जाएगा।

पुरानी याचिकाओं का बोझ और प्रभावहीन कानूनी मामले

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि इमरान खान से जुड़े कई मामले पहले से ही निचली अदालतों और उच्च न्यायालयों में लंबित हैं। मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि अगस्त 2023 के एक पुराने आदेश के बाद वर्तमान याचिका तकनीकी रूप से प्रभावहीन हो सकती है। इसी कड़ी में, अदालत ने तोशाखाना मामले में जमानत रद्द करने की याचिकाओं और अल-कादिर ट्रस्ट मामले से जुड़ी जमानत याचिका को भी ‘प्रभावहीन’ मानते हुए सुनने से इनकार कर दिया। इससे इमरान खान के कानूनी मोर्चे पर दबाव और बढ़ गया है।

साइफर केस और तीन सदस्यीय विशेष बेंच का गठन

पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने साइफर (Cipher) मामले में इमरान खान की रिहाई के खिलाफ दायर अपीलों पर विचार करने के लिए एक विशेष तीन सदस्यीय बेंच का गठन किया है। यह बेंच इस बात की समीक्षा करेगी कि क्या इमरान खान की पिछली रिहाई कानून के दायरे में थी। साथ ही, तोशाखाना और अन्य भ्रष्टाचार के मामलों में मिली राहत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी अब नए सिरे से कानूनी मंथन होगा।

9 मई की हिंसा: कड़ा रुख अपनाते हुए विशेष पीठ को सौंपा जिम्मा

पिछले साल 9 मई को लाहौर और पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में हुई हिंसक घटनाओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट काफी गंभीर दिख रहा है। इन घटनाओं से जुड़ी जमानत याचिकाओं और अन्य गंभीर आरोपों की सुनवाई के लिए एक अलग से तीन सदस्यीय विशेष पीठ बनाने का आदेश दिया गया है। 9 मई की हिंसा को पाकिस्तानी प्रतिष्ठान (Establishment) के खिलाफ विद्रोह के रूप में देखा जाता है, इसलिए इन मामलों में अदालत की सख्ती इमरान खान की राजनीतिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें: क्या मिलेगी राहत?

सुप्रीम कोर्ट ने अब आधिकारिक रूप से सरकार को मंगलवार तक अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है। पीटीआई समर्थक और इमरान खान के वकील इस उम्मीद में हैं कि मंगलवार को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत उन्हें जेल में मुलाकात की अनुमति प्रदान करेगी। वर्तमान में इमरान खान के खिलाफ दर्जनों मामले विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं, जिससे उनके लिए आने वाले दिन कानूनी तौर पर अत्यंत जटिल रहने वाले हैं।

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