होर्मुज स्ट्रेट में तनाव का असर: ईरानी तेल टैंकर फंसे, स्टोरेज भरने से समुद्र में रिसाव की आशंका

नई दिल्ली ईरान इस समय क्रूड ऑयल को स्टोर करने को लेकर गंभीर संकट का सामना कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट के आसपास की गई नाकेबंदी के चलते ईरानी तेल टैंकरों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में ईरान का कच्चा तेल उसके मुख्य निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप पर तेजी से जमा हो रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में इस इलाके के समुद्र में बड़े पैमाने पर तेल फैला हुआ नजर आया है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि स्टोरेज क्षमता खत्म होने के बाद तेल समुद्र में छोड़ा जा रहा

Wrriten By :

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Published On :

मई 11, 2026

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नई दिल्ली

ईरान इस समय क्रूड ऑयल को स्टोर करने को लेकर गंभीर संकट का सामना कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट के आसपास की गई नाकेबंदी के चलते ईरानी तेल टैंकरों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में ईरान का कच्चा तेल उसके मुख्य निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप पर तेजी से जमा हो रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में इस इलाके के समुद्र में बड़े पैमाने पर तेल फैला हुआ नजर आया है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि स्टोरेज क्षमता खत्म होने के बाद तेल समुद्र में छोड़ा जा रहा है या फिर पुराने ढांचे से रिसाव हो रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान प्रतिदिन 30 लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का उत्पादन करता है और इसका बड़ा हिस्सा खार्ग द्वीप से निर्यात होता है। फिलहाल अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण टैंकर फारस की खाड़ी से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ईरान ने पुराने जहाजों और फ्लोटिंग स्टोरेज टैंकरों का उपयोग शुरू किया, फिर भी स्टोरेज क्षमता तेजी से भरती चली गई। अगर तेल उत्पादन रोका जाता है तो कई तेल कुओं को स्थायी नुकसान हो सकता है। इसलिए तेहरान के सामने उत्पादन जारी रखने और अतिरिक्त तेल को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

45 वर्ग किमी तक फैला तेल का धब्बा
सैटेलाइट इमेजरी में खार्ग द्वीप के आसपास समुद्र में लगभग 20 से 45 वर्ग किलोमीटर तक फैला तेल का धब्बा देखा गया है। कुछ रिपोर्टों में अनुमान लगाया गया कि हजारों बैरल तेल समुद्र में रिस चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिसाव पुरानी पाइपलाइन, टैंकरों पर बढ़ते दबाव या युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण हो सकता है। पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी कि अगर स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो फारस की खाड़ी के समुद्री जीवन, तटीय क्षेत्रों और मछली उद्योग पर गंभीर असर पड़ सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। ईरान-अमेरिका तनाव और समुद्री टकराव के कारण वैश्विक तेल बाजार में भी भारी अस्थिरता देखी जा रही है। कई देशों को डर है कि अगर यह संकट और गहराया तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। भारत समेत एशियाई देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि वे पश्चिम एशिया से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं।

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