IMF Pakistan Report: आईएमएफ ने घटाया पाकिस्तान का विकास अनुमान, अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा रिपोर्ट ने पाकिस्तान के आर्थिक दावों की हवा निकाल दी है। विकास दर के अनुमान को घटाकर आईएमएफ ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान के लिए आने वाले दिन बेहद कठिन होने वाले हैं। आखिर क्या हैं वो आंकड़े जिन्होंने शहबाज शरीफ सरकार की नींद उड़ा दी है?

IMF Pakistan Report

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 2, 2026

IMF Pakistan Report : अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान की आर्थिक सेहत को लेकर एक बार फिर चिंताजनक संकेत दिए हैं। आईएमएफ ने चालू वित्त वर्ष के लिए पाकिस्तान की जीडीपी (GDP) वृद्धि दर के अनुमान को 3.2 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया है। तेजी से बढ़ती जनसंख्या वाले देश के लिए विकास दर में यह कटौती एक बड़ा संकट मानी जा रही है, क्योंकि इतनी कम दर बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई को थामने में विफल रहेगी। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) में 1.25 प्रतिशत की वास्तविक गिरावट दर्ज की गई है, जो अर्थव्यवस्था के पहियों के थमने का स्पष्ट संकेत है।

रेमिटेंस का सहारा: प्रवासी मजदूरों की कमाई पर टिकी उम्मीदें

वर्तमान में पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए केवल एक ही मोर्चा मजबूती दिखा रहा है, और वह है विदेशी रेमिटेंस। वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में प्रवासी श्रमिकों द्वारा भेजा गया धन 8.8 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी ऋण और प्रवासी मजदूरों की आय पर अत्यधिक निर्भरता किसी भी देश के लिए दीर्घकालिक विकास का आधार नहीं बन सकती। जब तक घरेलू उत्पादन और निर्यात में सुधार नहीं होता, तब तक यह स्थिरता कागजी ही बनी रहेगी।

आईएमएफ की सख्त शर्तें और सुधारों की मजबूरी

आईएमएफ से मिलने वाली आर्थिक सहायता मुफ्त नहीं आती; इसके साथ कड़ी शर्तें जुड़ी होती हैं। पाकिस्तान को सहायता पैकेज जारी रखने के लिए भारी कर (Tax), सब्सिडी में कटौती और कठोर बजटीय नियंत्रण लागू करने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यदि पाकिस्तान को स्थायी विकास हासिल करना है, तो उसे गैर-उत्पादक सरकारी उद्यमों (Loss-making SOEs) का बोझ कम करना होगा और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए साहसिक आर्थिक सुधार करने होंगे। बिना निवेश और प्रतिस्पर्धी कंपनियों के, वर्तमान आर्थिक स्थिरता लंबे समय तक टिक नहीं पाएगी।

आर्थिक स्थिरता के पीछे का सच: रोलओवर और विदेशी सहायता

भले ही पाकिस्तान सरकार चालू खाते के अधिशेष (Current Account Surplus) और गिरती महंगाई का श्रेय अपनी नीतियों को दे रही हो, लेकिन आईएमएफ की रिपोर्ट एक अलग कहानी बयां करती है। हकीकत यह है कि यह अधिशेष केवल बाहरी सहायता और ऋणों के पुनर्गठन (Roll-over) के कारण संभव हुआ है। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा पाकिस्तान के स्टेट बैंक में जमा 2 अरब डॉलर की राशि को एक और साल के लिए रोल ओवर करने का फैसला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। ऐसे में घरेलू नीतियों को इस सुधार का पूर्ण श्रेय देना मुश्किल है।

भविष्य की चुनौतियां: निवेश और प्रतिस्पर्धा की कमी

पाकिस्तान की आर्थिक तस्वीर में ‘निराशाजनक वृद्धि’ सबसे बड़ा काला धब्बा बनी हुई है। नीतिगत दरों में कटौती और मुद्रा (रुपया) की स्थिरता के बावजूद, जब तक देश का निर्यात क्षेत्र प्रतिस्पर्धी नहीं बनता, तब तक विदेशी कर्ज का चक्र चलता रहेगा। आईएमएफ का यह नया अनुमान सरकार के लिए एक चेतावनी है कि वे केवल सहायता पर निर्भर रहने के बजाय बुनियादी आर्थिक ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दें। यदि आगामी महीनों में औद्योगिक उत्पादन में सुधार नहीं हुआ, तो 3 प्रतिशत की विकास दर हासिल करना भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

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