I-PAC Raid : IPAC कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अचानक छापे के बाद देश की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। इस कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का व्यवहार और उनकी तेजी से की गई गतिविधियां राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई हैं। आरोप है कि वह पार्टी से जुड़े अहम और गोपनीय दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए खुद मैदान में उतर पड़ीं और एक चौकस पहरेदार की तरह सक्रिय दिखीं।
फाइल लेकर AIPAC नेता के घर से ऑफिस तक दौड़
प्रत्यक्षदर्शियों और राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि ममता बनर्जी AIPAC नेता प्रतीक जैन के आवास से हाथ में फाइल लेकर बाहर निकलीं और सीधे AIPAC ऑफिस की ओर रवाना हुईं। वहां से उन्होंने कुछ दस्तावेज अपनी कार में भी रखे। मुख्यमंत्री की इस तेजी और सक्रियता को लेकर गुरुवार से ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।
समर्थकों के लिए ‘हीरो’, विपक्ष के लिए ‘विलेन’
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस कदम को लेकर राय पूरी तरह बंटी हुई है। उनके समर्थक इसे पार्टी और राज्य की रक्षा के लिए उठाया गया साहसिक कदम बता रहे हैं और उन्हें ‘हीरो’ के तौर पर पेश कर रहे हैं। वहीं, विपक्ष इसे जांच एजेंसियों के काम में दखल और कानून से ऊपर होने की मानसिकता करार दे रहा है, जहां ममता बनर्जी ‘विलेन’ की भूमिका में दिखाई दे रही हैं।
‘बंगाल की फायर डॉटर’ और इंदिरा गांधी की याद
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीति के जानकारों को करीब पांच दशक पुरानी एक और घटना की याद दिला दी है। ममता बनर्जी को अक्सर ‘बंगाल की फायर डॉटर’ कहा जाता है और उनके इस कदम की तुलना देश की पहली ‘आयरन लेडी’ इंदिरा गांधी से की जा रही है। चर्चा उस कथित घटना की हो रही है, जिसमें इंदिरा गांधी पर CBI से कुछ गोपनीय दस्तावेज छिपाने का आरोप लगा था।
1977: जब इंदिरा गांधी पर गिरी थी गिरफ्तारी की गाज
साल 1977 में इमरजेंसी हटने के बाद इंदिरा गांधी को लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन पर लगे आरोपों की जांच के लिए शाह कमीशन गठित किया गया। कहा गया कि इंदिरा गांधी जांच में सहयोग नहीं कर रही थीं। इससे नाराज मोरारजी देसाई सरकार ने 3 अक्टूबर 1977 को CBI के जरिए उनकी गिरफ्तारी का फैसला किया।
CBI छापे और कथित ‘पास्ता मेकर’ की कहानी
लेखिका कैथरीन फ्रैंक की किताब इंदिरा: द लाइफ ऑफ इंदिरा नेहरू गांधी के अनुसार, गिरफ्तारी के दिन इंदिरा गांधी ने CBI अधिकारियों से तैयार होने के लिए समय मांगा। कहा जाता है कि इस दौरान उन्होंने कई फोन कॉल किए और कथित तौर पर कुछ गोपनीय कागजात नष्ट किए। अफवाहों में यह भी दावा किया गया कि उनकी बहू सोनिया गांधी के पास मौजूद पास्ता मेकर का इस्तेमाल दस्तावेजों को नष्ट करने के लिए किया गया था, हालांकि इसका कोई ठोस सबूत कभी सामने नहीं आया।
रातोंरात बदली थी देश की राजनीति
जब इंदिरा गांधी रात में बाहर निकलीं, तो उनके घर के बाहर मीडिया और कांग्रेस समर्थकों की भीड़ जमा हो चुकी थी। देशभर में प्रदर्शन शुरू हो गए और अदालत को रात में ही खोलना पड़ा। अंततः कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को गैर-कानूनी करार दिया। आज, करीब पांच दशक बाद, ED की कार्रवाई और ममता बनर्जी की सक्रियता ने भारतीय राजनीति में उसी तरह की तीखी बहस और यादों को फिर से जीवित कर दिया है।
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