Hydrogen Train India: हाइड्रोजन ट्रेन बनी घाटे का सौदा? टिकट से कमाई कम, खर्च ने बढ़ाई चिंता

Hydrogen Train India: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आधुनिक तकनीक की नई पहचान बन चुकी है, लेकिन शुरुआती संचालन में इसकी आय और खर्च के आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया है। आखिर रोजाना इतना खर्च क्यों हो रहा है और क्या भविष्य में यह परियोजना सफल साबित होगी? जानिए पूरी रिपोर्ट।

हाइड्रोजन ट्रेन बनी घाटे का सौदा?

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जुलाई 29, 2026

Hydrogen Train India: भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन इन दिनों हरियाणा के जींद- सोनीपत रेलखंड पर नियमित रूप से संचालित हो रही है। यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक तकनीक का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है, लेकिन शुरुआती संचालन के आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल इसकी आय की तुलना में खर्च काफी अधिक है। रेलवे इस परियोजना को एक तकनीकी परीक्षण और भविष्य की हरित परिवहन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है।

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रोजाना ईंधन पर भारी खर्च

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस हाइड्रोजन ट्रेन को चलाने के लिए प्रतिदिन लगभग ₹80,000 से ₹90,000 तक का खर्च केवल हाइड्रोजन गैस पर आ रहा है। वहीं, यात्रियों से मिलने वाली टिकट आय फिलहाल करीब ₹7,000 प्रतिदिन के आसपास है। यानी ट्रेन की कमाई की तुलना में ईंधन पर होने वाला खर्च लगभग 12 गुना अधिक है।

जानकारी के मुताबिक, ट्रेन के संचालन में प्रति किलोमीटर करीब ₹500 का खर्च आता है। जींद से सोनीपत और वापसी सहित प्रतिदिन लगभग 160 किलोमीटर की यात्रा के दौरान केवल ईंधन पर ही बड़ी राशि खर्च हो रही है। इसके अलावा रखरखाव, तकनीकी निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों से जुड़े अन्य परिचालन खर्च अलग हैं।

प्रधानमंत्री ने दिखाई थी हरी झंडी

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जींद रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर किया था। इसके बाद से ट्रेन का नियमित संचालन जारी है। रेलवे की विशेषज्ञ टीमें लगातार ट्रेन की ईंधन खपत, सुरक्षा प्रणाली, प्रदर्शन और तकनीकी क्षमता की निगरानी कर रही हैं ताकि भविष्य में इस तकनीक को और बेहतर बनाया जा सके।

यह ट्रेन प्रतिदिन सुबह 7:40 बजे जींद रेलवे स्टेशन से रवाना होकर सोनीपत पहुंचती है और निर्धारित समय के अनुसार अपनी सेवाएं देती है।

धीरे-धीरे बढ़ रही है यात्रियों की संख्या

शुरुआती दिनों में ट्रेन में यात्रियों की संख्या सीमित रही, लेकिन समय के साथ इसमें धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक 307 यात्री इस ट्रेन में सफर कर चुके हैं।

यात्रियों की संख्या इस प्रकार दर्ज की गई—

  • 18 जुलाई: 22 यात्री
  • 19 जुलाई: 25 यात्री
  • 20 जुलाई: 30 यात्री
  • 21 जुलाई: 32 यात्री
  • 22 जुलाई: 37 यात्री
  • 23 जुलाई: 42 यात्री
  • 24 जुलाई: रखरखाव के लिए ट्रेन सेवा बंद रही
  • 25 जुलाई: 20 यात्री
  • 26 जुलाई: 27 यात्री
  • 27 जुलाई: 32 यात्री
  • 28 जुलाई: 40 यात्री

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि लोगों की रुचि धीरे-धीरे बढ़ रही है और आने वाले समय में यात्रियों की संख्या में और वृद्धि की उम्मीद की जा रही है।

सोनीपत की ओर से ज्यादा मिल रहे यात्री

रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, जींद से सोनीपत जाने वाले यात्रियों की संख्या अभी अपेक्षाकृत कम है और यह 50 के आसपास ही रहती है। दूसरी ओर, सोनीपत से जींद आने वाले यात्रियों की संख्या कई बार 100 से अधिक दर्ज की गई है। इसके अलावा रास्ते के विभिन्न स्टेशनों पर भी बड़ी संख्या में यात्री ट्रेन में चढ़ते और उतरते हैं, जिससे ट्रेन का उपयोग धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

मासिक सीजन टिकट में भी बढ़ोतरी

हाइड्रोजन ट्रेन शुरू होने से पहले इस रूट पर करीब 90 मासिक सीजन टिकट (MST) धारक नियमित यात्रा करते थे। ट्रेन के संचालन के बाद सात नए एमएसटी भी जारी किए गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों का भरोसा इस सेवा पर धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे लोगों को इस नई सेवा की जानकारी मिलेगी और इसकी उपयोगिता बढ़ेगी, वैसे-वैसे नियमित यात्रियों की संख्या और टिकटों की बिक्री में भी इजाफा होगा।

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रेलवे ने भविष्य को देखते हुए शुरू किया प्रोजेक्ट

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हाइड्रोजन ट्रेन का उद्देश्य केवल तत्काल मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली को विकसित करना और भविष्य की तकनीक का परीक्षण करना है। शुरुआती चरण में लागत अधिक होना स्वाभाविक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े स्तर पर उत्पादन, तकनीकी सुधार और यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ भविष्य में संचालन लागत कम हो सकती है।

फिलहाल रेलवे इस परियोजना से जुड़े सभी तकनीकी और आर्थिक पहलुओं का लगातार मूल्यांकन कर रहा है ताकि भविष्य में देश के अन्य रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा सके।