Hungary Ukraine Aid: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को चार वर्ष पूरे होने वाले हैं, लेकिन इस बीच यूरोपीय संघ (EU) के भीतर एक नया कूटनीतिक युद्ध छिड़ गया है। हंगरी ने यूक्रेन को दी जाने वाली 90 अरब यूरो की भारी-भरकम आर्थिक सहायता पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। हंगरी सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन को युद्ध जारी रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय फंड की सख्त दरकार है। हंगरी के इस रुख ने न केवल ब्रुसेल्स (ईयू मुख्यालय) में खलबली मचा दी है, बल्कि युद्धग्रस्त यूक्रेन के लिए एक गंभीर वित्तीय और रणनीतिक संकट भी पैदा कर दिया है।
तेल बनाम सहायता: हंगरी ने लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप
इस विवाद के केंद्र में ऊर्जा सुरक्षा और तेल की आपूर्ति है। हंगरी के विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्टो ने सीधे तौर पर यूक्रेन पर ‘ऊर्जा ब्लैकमेल’ का आरोप लगाया है। सिज्जार्टो का कहना है कि यूक्रेन ने हंगरी को होने वाली रूसी तेल की सप्लाई को बाधित कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक यूक्रेन तेल पाइपलाइन के जरिए आपूर्ति बहाल नहीं करता, तब तक हंगरी यूक्रेन के पक्ष में लिए जाने वाले यूरोपीय संघ के हर फैसले को ‘वीटो’ करता रहेगा। हंगरी ने अपनी आक्रामकता दिखाते हुए यूक्रेन को भेजे जाने वाले डीजल की महत्वपूर्ण खेप को भी दो दिन पहले रोक दिया था।
ईयू में आंतरिक दरार और विक्टर ओर्बन का रूसी झुकाव
यह गतिरोध यूरोपीय संघ के भीतर बढ़ती फूट को भी उजागर करता है। जहाँ अधिकांश यूरोपीय देशों ने रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता को लगभग समाप्त कर दिया है, वहीं हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन इसे अपने देश की अर्थव्यवस्था के लिए अपरिहार्य मानते हैं। ओर्बन को अक्सर यूरोपीय संघ के भीतर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता है। वह लगातार यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद और रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का विरोध करते रहे हैं। हंगरी और स्लोवाकिया को वर्तमान में रूसी तेल आयात पर अस्थायी छूट मिली हुई है, लेकिन यूक्रेन के रास्ते होने वाली इस आपूर्ति में बाधा आने से दोनों देश भड़के हुए हैं।
106 अरब डॉलर का कर्ज और यूक्रेन की सैन्य चुनौतियां
हंगरी की इस अड़ंगेबाजी का असर केवल आर्थिक मदद पर ही नहीं, बल्कि उस महत्वपूर्ण 106 अरब डॉलर के ऋण पैकेज पर भी पड़ा है जिसे पिछले दिसंबर में मंजूरी दी गई थी। यह कर्ज यूक्रेन के रक्षा बजट और बुनियादी ढांचे को संभाले रखने के लिए जीवनरेखा माना जा रहा था। हंगरी ने अब इस फाइल को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यूक्रेन के लिए यह स्थिति डरावनी है क्योंकि उसे अगले दो वर्षों के सैन्य खर्चों के लिए इसी फंड पर भरोसा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह फंड समय पर नहीं मिला, तो मोर्चे पर यूक्रेन की स्थिति कमजोर हो सकती है।
पाइपलाइन विवाद की असल वजह क्या है?
विवाद की मुख्य जड़ वह पाइपलाइन है जो यूक्रेन के क्षेत्र से गुजरते हुए हंगरी और स्लोवाकिया तक रूसी कच्चा तेल पहुँचाती है। 27 जनवरी से इस पाइपलाइन से होने वाली आपूर्ति ठप पड़ी है। यूक्रेन का तर्क है कि रूसी ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई है और उसकी मरम्मत में समय लग रहा है। हालांकि, हंगरी इस दलील को खारिज कर रहा है और इसे जानबूझकर की गई साजिश मान रहा है। इस खींचतान ने न केवल मध्य यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, बल्कि यूक्रेन की आर्थिक स्थिरता को भी एक बड़े अनिश्चित काल में धकेल दिया है।
Read More: धान उपार्जन में फर्जीवाड़ा करने वाले राइस मिल के मुंशी समेत 4 गिरफ्तार









