Hrithik Roshan: फिल्ममेकर नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों के बीच लंबे समय से अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। जब इस मेगा बजट फिल्म का आधिकारिक ऐलान हुआ था, तभी से सोशल मीडिया पर लोग इस संशय में थे कि आखिर चॉकलेटी बॉय रणबीर कपूर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के दिव्य किरदार में कैसे फिट बैठेंगे। 4000 करोड़ रुपये की विशाल लागत (Big budget film) से बन रही यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की अब तक की सबसे महंगी फिल्म मानी जा रही है। हाल ही में मेकर्स ने इस ऐतिहासिक फिल्म का बहुप्रतीक्षित टीज़र रिलीज किया, जिसके आते ही इंटरनेट पर रिएक्शंस और कमेंट्स की जबरदस्त बाढ़ आ गई है।
टीज़र पर छिड़ा इंटरनेट वॉर और ऋतिक रोशन का बड़ा बयान
टीज़र के सामने आने के बाद सिनेप्रेमियों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहां कुछ फैंस को इसका भव्य विजन काफी पसंद आया है, वहीं दर्शकों का एक बड़ा धड़ा टीज़र में दिखाए गए कई शॉट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कमजोर स्पेशल इफेक्ट्स (VFX) के अत्यधिक इस्तेमाल का कड़ा विरोध कर रहा है। इसी बीच बॉलीवुड के ‘कृष’ यानी ऋतिक रोशन ने इस पूरी बहस में एंट्री ली है। ऋतिक ने एक लंबा-चौड़ा नोट लिखकर बिना किसी का नाम लिए विजुअल इफेक्ट्स के पीछे का सच और अपना निजी अनुभव साझा किया है।
ऋतिक रोशन की पुरानी यादें
अपने इमोशनल और इंफॉर्मेटिव पोस्ट में ऋतिक रोशन ने लिखा, “हाँ, कुछ वीएफएक्स बेहद खराब और असहज करने वाले होते हैं। खासतौर पर मेरे लिए इन्हें देखना और मुश्किल हो जाता है, जब मैं खुद उस प्रोजेक्ट का हिस्सा रहा हूँ या बनने जा रहा हूँ।” ऋतिक ने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि जब वह 11 साल के थे, तब लंदन ट्रिप के दौरान उन्होंने ‘बैक टू द फ्यूचर’ फिल्म देखी थी और वह इसके दीवाने हो गए थे। उन्होंने स्पेशल इफेक्ट्स को समझने के लिए अपनी पॉकेट मनी से ‘इंडस्ट्रियल लाइट एंड मैजिक: द आर्ट ऑफ स्पेशल इफेक्ट्स’ नाम की किताब भी ऑर्डर की थी।
मेकर्स का बचाव और आर्टिस्ट्स की कड़ी मेहनत
ऋतिक ने आगे लिखा कि जो मेकर्स ऐसी बड़ी कहानियां पर्दे पर उतारने का साहस करते हैं, वे उनके लिए किसी सुपरहीरो से कम नहीं हैं। उन्होंने फिल्म ‘कल्कि’, ‘बाहुबली’ और ‘रामायण’ (साथ ही अपने पिता राकेश रोशन की ‘कोई मिल गया’ और ‘कृष’) का उदाहरण देते हुए कहा कि इन निर्देशकों के पास वो गजब का विजन है जो सिनेमाई अनुभव को बदल देता है। ऋतिक के अनुसार, मेकर्स करोड़ों रुपये का रिस्क सिर्फ इसलिए लेते हैं ताकि दर्शकों को जादुई दुनिया का एहसास कराया जा सके।
आलोचना करने से पहले सोचना जरूरी
ऋतिक ने दर्शकों और आलोचकों से गुजारिश करते हुए लिखा कि किसी भी बड़े बजट की हेवी वीएफएक्स (Heavy VFX) फिल्म को बनाने में सैकड़ों डिजिटल आर्टिस्टों के सालों की मेहनत और पसीना लगा होता है। इसलिए सोशल मीडिया पर सीधे गाली देने या ‘बैश’ करने से पहले हमें थोड़ा सोचना चाहिए। पौराणिक कहानियों (Mythology) में जीवंतता लाना बेहद कठिन काम है।
विजुअल इफेक्ट्स के अलग-अलग स्टाइल्स और फोटोरियलिज्म
ऋतिक ने सिनेमा लवर्स को ज्ञान देते हुए समझाया कि वीएफएक्स के कई अलग-अलग स्टाइल होते हैं। जैसे ‘फोटोरियलिज्म’ (Photorealism), जहां आपको पता ही नहीं चलता कि कंप्यूटर ग्राफिक्स का इस्तेमाल हुआ है, जैसे ‘जेम्स बॉन्ड’ या ‘वॉर’। वहीं कुछ मेकर्स ‘स्टोरीटेलिंग स्टाइलाइज्ड’ वीएफएक्स चुनते हैं ताकि कहानी में ज्यादा जादू और फंतासी घोली जा सके, जैसा ‘300’ या ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ में दिखा था।
‘हर फिल्म में एक जैसा चश्मा पहनकर देखना गलत अप्रोच’
ऋतिक ने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई फिल्म मेकर जानबूझकर अपनी कहानी को ‘स्टोरी स्टाइल’ में बना रहा है, तो उसमें ‘फोटोरियलिज्म’ न ढूंढें। सिर्फ इसलिए किसी मेकर की रचनात्मकता को क्रिटिसाइज नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने आपके सोचे हुए विजुअल स्टाइल को फॉलो नहीं किया। अगली बार जब आप कहें कि ‘खराब वीएफएक्स है’, तो याद रखें कि शायद वो सिर्फ वैसा नहीं था जैसा आपने अपनी कल्पना में सोचा था।










