715 नंबर लाने पर भी आर्यन और पांशुल की रैंक अलग कैसे हुई

नई दिल्ली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने जब से री-नीट परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है तब से लेकर टॉपर और विवाद दोनों की चर्चा हो रही है. पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने अपनी कड़ी मेहनत के साथ परीक्षा में 720 में से 715 नंबर लाकर ऑफ इंडिया रैंक-1 और रैंक-2 हासिल किया है. लेकिन एक जैसे नंबर होने के बाद भी दोनों की रैंक अलग-अलग क्यों है. NTA की मेरिट लिस्ट के मुताबित, आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 मिला. ऐसे में कई लोगों के मन

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Published On :

जुलाई 20, 2026

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नई दिल्ली
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने जब से री-नीट परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है तब से लेकर टॉपर और विवाद दोनों की चर्चा हो रही है. पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने अपनी कड़ी मेहनत के साथ परीक्षा में 720 में से 715 नंबर लाकर ऑफ इंडिया रैंक-1 और रैंक-2 हासिल किया है. लेकिन एक जैसे नंबर होने के बाद भी दोनों की रैंक अलग-अलग क्यों है. NTA की मेरिट लिस्ट के मुताबित, आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 मिला. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब दोनों के नंबर सेम हैं, तो रैंक अलग क्यों है. तो चलिए जानते हैं इससे जुड़ा नियम.

क्या है NTA का नियम?
बता दें कि अगर किसी दो छात्रों का कुल नंबर बराबर होते सबसे पहले बायोलॉजी यानी बॉटनी और जूलॉजी के अंक देखे जाते हैं. जिन उम्मीदवार के बायोलॉजी में अच्छे नंबर होते हैं, उन्हें बेहतर रैंक दी जाती है. मेडिकल प्रवेश परीक्षा में इस विषय को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है. अगर मान लेते हैं कि दोनों छात्रों के बायोलॉजी के मार्क्स भी सेम होते हैं, तो केमिस्ट्री के अंकों को देखा जाता है. इसमें भी समान रहने पर फिजिक्स के नंबर देखे जाते हैं.

लेकिन अगर तीनों की विषय में एक जैसे नंबर होते हैं, तो दोनों उम्मीदवारों के सही और गलत उत्तरों का अनुपात कैसा रखा है, वह देखा जाता है. जिस उम्मीदवार ने कम गलत उत्तर दिए होते हैं या जिसका गलत उत्तरों का अनुपात कम होता है, उसे ऊपर की रैंक मिलती है. अगर इन सभी चरणों के बाद भी बराबरी बनी रहती है, तो एक स्वतंत्र एक्सपर्ट समिति की निगरानी में रैंडम प्रक्रिया के जरिए अंतिम रैंक तय की जाती है.

आर्यन और पांशुल में क्या हुआ?
हालांकि, दोनों उम्मीदवारों ने 715 नंबर ही हासिल किए लेकिन उनकी विषयवार परफॉर्मेंस पूरी तरह से अलग थी. एनटीए के टाई ब्रेकिंग नियम के अनुसार जिस अभ्यर्थी का प्रदर्शन पहले तुलना वाले चरण में बेहतर होता है, उसे मेरिट लिस्ट में पहला स्थान दिया जाता है. इसके तहत ही दोनों टॉपर के अलग-अलग रैंक दी गई है.

पहले उम्र से तय होती थी रैंक
बता दें कि पहले इस स्थिति में जिस उम्मीदवार की रैंक ज्यादा होती थी, उसे प्राथमिकता दी जाती थी. लेकिन बाद में जब इस नियम को लेकर विवाद हुआ तो इसे हटा दिया गया.

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