Israel-Iran War: हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर दागी बैलिस्टिक मिसाइलें, यमन की एंट्री से दहला मिडल ईस्ट

28 मार्च 2026 की सुबह यमन के हूती विद्रोहियों ने इजरायल के दक्षिणी हिस्से और नेगेव रेगिस्तान की ओर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने मिसाइल को इंटरसेप्ट करने का दावा किया है, लेकिन इस हमले ने वैश्विक व्यापार और समुद्री मार्गों पर खतरे के बादल मंडरा दिए हैं।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 28, 2026

Israel-Iran War:  मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब एक अत्यंत विनाशकारी और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। 28 मार्च, 2026 को इजरायल और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध में अब यमन के हूती विद्रोहियों ने भी आधिकारिक तौर पर मोर्चा खोल दिया है। इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने शनिवार सुबह इस बात की पुष्टि की कि यमन की सीमा से इजरायल के भीतर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई है। फरवरी में शुरू हुए इस युद्ध के बाद से यह हूती विद्रोहियों द्वारा किया गया पहला सीधा और बड़ा हमला है, जिसने क्षेत्रीय स्थिरता को पूरी तरह हिला कर रख दिया है।

इजरायल के नेगेव में गूंजे युद्ध के सायरन: एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय

IDF के आधिकारिक बयान के अनुसार, जैसे ही यमन की ओर से मिसाइल दागी गई, इजरायल के अत्याधुनिक रडार सिस्टम ने उसे ट्रैक कर लिया। खतरे की गंभीरता को देखते हुए बीर शेबा और नेगेव के रिहायशी इलाकों में तुरंत युद्ध के सायरन बजाए गए। सायरन की आवाज सुनते ही स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया और लोग सुरक्षा बंकरों की ओर भागने लगे। इजरायल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम (Arrow/Iron Dome) को तुरंत सक्रिय कर दिया गया। शुरुआती जांच के मुताबिक, इस हमले में फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन इसने इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।

हूतियों की चेतावनी: ऑपरेशन रोरिंग लायनके खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप

यह हमला इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के जवाब में देखा जा रहा है। यमन की सशस्त्र सेनाओं ने शुक्रवार को ही चेतावनी जारी की थी कि यदि इजरायल और अमेरिका ने ईरान तथा उसके सहयोगी गुटों पर हमले बंद नहीं किए, तो वे सीधे युद्ध में कूद पड़ेंगे। हूतियों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनकी सेनाएं सीधे सैन्य हस्तक्षेप के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हूतियों का आरोप है कि इजरायल इस युद्ध की आड़ में ‘ग्रेटर इजरायल’ बनाने के अपने गुप्त एजेंडे को पूरा करने की कोशिश कर रहा है।

लाल सागर में तनाव: वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर मंडराया खतरा

हूतियों ने केवल मिसाइल हमला ही नहीं किया, बल्कि लाल सागर (Red Sea) को लेकर भी सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि लाल सागर के जलमार्ग का उपयोग ईरान या किसी अन्य मुस्लिम देश के खिलाफ हमले के लिए किया गया, तो वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। ईरान समर्थित इन विद्रोहियों की सक्रियता ने वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और फैला, तो स्वेज नहर के माध्यम से होने वाला व्यापार बाधित हो सकता है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ेगा।

ईरान को लगे बड़े झटकों के बीच हूतियों का जवाबी पलटवार

यह हमला उस समय हुआ है जब ईरान को इस युद्ध में अपूरणीय क्षति उठानी पड़ी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के मारे जाने की खबरें हैं। ऐसे में हूतियों का हमला ईरान के खेमे की ओर से एक हताश लेकिन आक्रामक जवाबी कार्रवाई मानी जा रही है। यमन के विद्रोहियों को ईरान का मजबूत सामरिक और वित्तीय समर्थन प्राप्त है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे ईरान के कमजोर पड़ने पर उसकी जगह मोर्चा संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता: क्या छिड़ेगा तीसरा विश्व युद्ध?

यमन की इस सीधी एंट्री के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और इजरायल की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। अमेरिका पहले ही क्षेत्र में अपने युद्धपोत तैनात कर चुका है। कूटनीतिक विशेषज्ञों को डर है कि यदि इजरायल ने यमन पर जवाबी हमला किया, तो यह युद्ध बहुपक्षीय हो जाएगा, जिसमें कई अन्य अरब देश भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल, वैश्विक समुदाय शांति की अपील कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत बता रही है कि पश्चिम एशिया एक बड़े महायुद्ध की कगार पर खड़ा है।

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