Hormuz Tension: ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिरोध एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज को जब्त किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। इस घटना ने न केवल खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आहट तेज कर दी है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
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कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है। सोमवार को कारोबार शुरू होते ही अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) की कीमतों में 6.4% की बढ़ोतरी हुई, जिससे यह 87.88 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड भी 6.5% की छलांग लगाकर 96.25 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलमार्ग पर नाकाबंदी जारी रहती है, तो तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार जा सकती हैं।
होर्मुज में सैन्य टकराव और ‘टौस्का’ की जब्ती
तनाव की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखने का आदेश दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरानी जहाज ‘टौस्का’ को छह घंटे के भीतर कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन उसने नाकाबंदी रेखा को पार करने की कोशिश की। इसके बाद अमेरिकी मिसाइल विध्वंसक पोत ने कार्रवाई करते हुए जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया और उसे जब्त कर लिया।
ईरान ने इस कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ और ‘युद्धविराम का उल्लंघन’ करार दिया है। ईरान की सेना (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा बंद करने का ऐलान कर दिया है। गौरतलब है कि शनिवार को IRGC की ओर से की गई गोलीबारी की चपेट में भारत के भी दो जहाज आए थे, जिस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने गहरी चिंता जताई है।
शांति वार्ता पर अनिश्चितता के बादल
इस सैन्य टकराव ने पाकिस्तान में प्रस्तावित आगामी शांति वार्ता को भी संकट में डाल दिया है। अमेरिकी वार्ताकारों को सोमवार को पाकिस्तान पहुंचना था ताकि बुधवार को युद्धविराम की समय सीमा समाप्त होने से पहले कोई समाधान निकाला जा सके। हालांकि, तेहरान ने वर्तमान स्थितियों को देखते हुए इस वार्ता के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। अमेरिका द्वारा की गई नाकाबंदी और ईरान द्वारा जलमार्ग को बंद करने की धमकी ने दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो पूरी दुनिया में ईंधन का संकट पैदा हो सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है। फिलहाल, दोनों देशों के बीच टकराव कम होने के आसार नहीं दिख रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर पैनी नजर बनाए हुए है।









