Holocaust Memorial PM Modi : होलोकॉस्ट मेमोरियल पहुंचे PM मोदी, हिटलर की सनक के शिकार लोगों को दी श्रद्धांजलि, क्या है इसका कूटनीतिक संदेश?

येरुशलम की खामोशी में छिपा इतिहास: जब पीएम मोदी का सामना हुआ मानवता के सबसे काले अध्याय से! आखिर याद वाशेम की उन दीवारों ने प्रधानमंत्री को क्या संदेश दिया, जिसने पूरे विश्व को भावुक कर दिया? एक ऐतिहासिक दौरे का वो पल, जिसने बढ़ा दी कूटनीतिक हलचल!

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 26, 2026

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Holocaust Memorial PM Modi :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे का दूसरा दिन ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षणों के साथ शुरू हुआ। उन्होंने येरुशलम स्थित होलोकॉस्ट स्मारक याद वाशेम पहुंचकर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मारे गए लाखों यहूदियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्मारक उन पीड़ितों की स्मृति में स्थापित किया गया है, जो नाजी जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर की यहूदी-विरोधी नीतियों का शिकार बने। प्रधानमंत्री ने वहां मौजूद संग्रहालय का अवलोकन किया और पीड़ितों की याद में मौन रखा।

 ‘याद वाशेम’ का ऐतिहासिक महत्व

येरुशलम में स्थित यह स्मारक होलोकॉस्ट की त्रासदी को दुनिया के सामने जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। वर्ष 2005 में यहां एक आधुनिक संग्रहालय की स्थापना की गई, जिसमें हॉल ऑफ नेम्स, बच्चों का स्मारक, राइटियस अमंग द नेशंस गार्डन और विस्तृत होलोकॉस्ट गैलरी शामिल हैं। यहां असली दस्तावेज, तस्वीरें और पीड़ितों की व्यक्तिगत कहानियां संरक्षित हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां इतिहास से सीख ले सकें। ‘याद वाशेम’ का अर्थ है ‘स्मृति और नाम’, जो इस बात का प्रतीक है कि जिन लोगों को इतिहास से मिटाने की कोशिश की गई, उनकी पहचान और स्मृति हमेशा जीवित रहेगी।

राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से द्विपक्षीय वार्ता

स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात की। इस बैठक में भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक साझेदारी, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत और इजरायल के संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से प्रगाढ़ हुए हैं, और यह मुलाकात उसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

नेतन्याहू के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक

प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी की। इस बैठक में रक्षा सहयोग, मिसाइल डिफेंस सिस्टम, साइबर सुरक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों के बीच संभावित रक्षा समझौतों पर भी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि यह दौरा रक्षा और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

नेसेट को संबोधन और सम्मान

इजरायल पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत स्वयं नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने किया था। इसके बाद उन्होंने इजरायल की संसद नेसेट को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्हें ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। मोदी इस प्रतिष्ठित मंच को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने, जो दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों का प्रतीक है।

26 फरवरी का कार्यक्रम और रणनीतिक महत्व

26 फरवरी को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के तहत सुबह 9 बजे याद वाशेम में श्रद्धांजलि, 10:30 बजे राष्ट्रपति हर्जोग से मुलाकात, 11:30 बजे नेतन्याहू के साथ बैठक, दोपहर 12:45 बजे समझौतों पर हस्ताक्षर और संयुक्त प्रेस बयान, तथा 1:15 बजे भारत के लिए प्रस्थान शामिल रहा। यह दौरा भारत-इजरायल के बीच रणनीतिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के संबंधों में यह यात्रा एक नई ऊर्जा और दीर्घकालिक साझेदारी की संभावनाएं लेकर आई है।

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